इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। 17 फरवरी 2026 को सुनाए गए इस फैसले में कोर्ट ने जहाँ सरकार की नीति को संवैधानिक रूप से सही ठहराया है, वहीं शिक्षकों को अपनी बात रखने का एक ठोस मंच भी प्रदान किया है।
1. नीति की वैधता: छात्र हित सर्वोपरि
न्यायालय ने 14 नवंबर 2025 के शासनादेश को वैध माना है। कोर्ट का तर्क है कि RTE अधिनियम की धारा 25 के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को बनाए रखना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। व्यक्तिगत असुविधा के ऊपर बच्चों के शिक्षा के अधिकार (अनुच्छेद 21-A) को प्राथमिकता दी गई है।
2. 'यथास्थिति' (Status Quo) से मिली फौरी राहत
शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि कोर्ट ने 17 मार्च 2026 तक (एक महीने के लिए) 'यथास्थिति' बनाए रखने का आदेश दिया है। इस दौरान:
- तबादला आदेशों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
- शिक्षकों को उनके वर्तमान कार्यस्थल पर तब तक बने रहने की अनुमति दी जा सकती है, जब तक समिति उनकी आपत्तियों का निस्तारण नहीं कर देती।
3. जिला स्तरीय समिति: शिकायतों का निवारण
कोर्ट ने एक पारदर्शी तंत्र स्थापित किया है। अब पीड़ित शिक्षक सीधे जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
- आधार: आपत्ति केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि डेटा-आधारित (छात्र संख्या बनाम कार्यरत शिक्षक) होनी चाहिए।
- सत्यापन: अधिकारियों को UDISE पोर्टल के डेटा को तत्काल अपडेट और सत्यापित करने का आदेश दिया गया है।
4. समयबद्ध और तार्किक निर्णय (Speaking Order)
अधिकारियों को मनमानी की छूट नहीं दी गई है। समिति को प्रत्येक प्रत्यावेदन पर एक महीने के भीतर 'सकारण आदेश' (Reasoned Order) जारी करना होगा। यानी, यदि आपकी आपत्ति खारिज होती है, तो प्रशासन को उसका लिखित और तर्कपूर्ण कारण बताना होगा।
5. उत्पीड़न पर लगाम
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि समायोजन का उपयोग 'दंडात्मक स्थानांतरण' के रूप में नहीं किया जा सकता। यह प्रक्रिया केवल प्रशासनिक आवश्यकता और शैक्षिक सुधार के लिए है, न कि किसी शिक्षक को परेशान करने के लिए।
📌 प्रभावित शिक्षक अब क्या करें? (Next Steps)
यदि आप इस समायोजन प्रक्रिया से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हैं, तो इन चरणों का पालन करें:
- समय सीमा का ध्यान रखें: आपके पास अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए केवल 7 दिनों का समय है।
- डेटा जुटाएं: अपने स्कूल की वर्तमान छात्र संख्या और वहां तैनात शिक्षकों का सटीक डेटा तैयार रखें।
- प्रत्यावेदन (Representation): अपना विस्तृत और तर्कपूर्ण प्रत्यावेदन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के माध्यम से DM की समिति को सौंपें।
- पावती (Receipt) लें: अपने आवेदन की रिसीविंग जरूर लें ताकि भविष्य में कानूनी जरूरत पड़ने पर आपके पास प्रमाण हो।


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