शिक्षा मंत्रालय और राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए PRASHAST 2.0 (Pre-Assessment Holistic Screening Tool) एप के संबंध में नए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पत्रांक 8834 दिनांक 14 फरवरी, 2026 के अनुसार, अब परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों की स्क्रीनिंग डिजिटल माध्यम से की जाएगी।
📱 PRASHAST 2.0 एप क्या है?
यह एक डिजिटल स्क्रीनिंग टूल है जिसे स्कूली स्तर पर बच्चों में दिव्यांगताओं की पहचान करने के लिए विकसित किया गया है। इस एप के माध्यम से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में वर्णित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की प्रारंभिक स्तर पर पहचान की जा सकती है।
📋 मुख्य दिशा-निर्देश और उत्तरदायित्व
स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं:
- लक्षित विद्यालय: समस्त परिषदीय विद्यालय, सरकारी सहायता प्राप्त (Govt. Aided) विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV)।
- उपयोगकर्ता (Users): प्रधानाध्यापक, कक्षा अध्यापक, स्पेशल एजुकेटर्स और फिजियोथेरेपिस्ट।
- प्रक्रिया: शिक्षकों द्वारा प्रारंभिक स्क्रीनिंग की जाएगी, जिसके बाद स्पेशल एजुकेटर्स द्वारा डेटा का सत्यापन और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
📅 समय सीमा (Deadlines)
कार्य की महत्ता को देखते हुए निम्नलिखित समय सीमा निर्धारित की गई है:
- 28 फरवरी, 2026 तक: सभी प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और स्पेशल एजुकेटर्स को एप डाउनलोड कर अपना पंजीकरण (Registration) अनिवार्य रूप से पूर्ण करना होगा।
- 31 मार्च, 2026 तक: समस्त संबंधित विद्यालयों को एप पर Onboard/Add करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
📥 इंस्टॉलेशन और महत्वपूर्ण लिंक
प्रशस्त एप को सुलभ बनाने के लिए विभाग द्वारा निम्नलिखित लिंक जारी किए गए हैं:
- एप डाउनलोड लिंक: Google Play Store - PRASHAST App
- यूजर मेनुअल (PDF): यहाँ से डाउनलोड करें - सचित्र मार्गदर्शिका (विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध)
- ट्रेनिंग वीडियो: YouTube Training Link (एप के संचालन को समझने के लिए)
🛠️ पंजीकरण और उपयोग की प्रक्रिया
- डाउनलोड: सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से PRASHAST 2.0 इंस्टॉल करें।
- लॉगिन/रजिस्ट्रेशन: अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण करें।
- प्रोफाइल सेटअप: अपनी भूमिका (प्रधानाध्यापक/शिक्षक) का चयन करें और विद्यालय का यू-डाइस (U-DISE) कोड दर्ज करें।
- स्क्रीनिंग: चेकलिस्ट के माध्यम से छात्र-छात्राओं के व्यवहार और शारीरिक लक्षणों के आधार पर डेटा फीड करें।







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