इलाहाबाद/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों और सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
शिक्षा निदेशालय (बेसिक) द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ खण्डपीठ द्वारा रिट याचिका संख्या 5943/2024 (अनिल बाजपेई बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) में पारित आदेशों के अधीन है। न्यायालय ने 25 सितंबर 2024 और 16 दिसंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए विभाग को पदोन्नति के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए थे।
2003 का सरकारी आदेश (GO) हुआ रद्द
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब माननीय न्यायालय ने 10 अप्रैल 2003 के उस शासनादेश को रद्द कर दिया, जिसके द्वारा पदोन्नति की नियमावली को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 309 के तहत बनी नियमावली (1992) को केवल कार्यकारी आदेशों से नहीं बदला जा सकता। इसके बाद अब 'उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रति उप विद्यालय निरीक्षक) सेवा नियमावली-1992' के नियम-5(1) के तहत पदोन्नति का मार्ग खुल गया है।
पदोन्नति के लिए मुख्य शर्तें
नियमावली के अनुसार, रिक्तियों को भरने के लिए निम्नलिखित व्यवस्था दी गई है:
- 10% कोटा: चयन समिति के माध्यम से ऐसे प्रधानाध्यापकों/प्रधानाध्यापिकाओं के लिए आरक्षित है जिन्होंने भर्ती वर्ष के प्रथम दिवस को अपने पद पर कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
- अनिवार्य दस्तावेज: संबंधित शिक्षकों की सेवा पुस्तिका (Service Book) की प्रमाणित छाया प्रति और निर्धारित प्रारूप पर सूचना तत्काल निदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) श्री कामता राम पाल ने समस्त मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को निर्देशित किया है कि इस प्रकरण को 'सर्वोच्च प्राथमिकता' दी जाए। कोर्ट में अवमानना वाद (Contempt Case) की स्थिति को देखते हुए विभाग ने साफ किया है कि सूचनाएं भेजने में किसी भी प्रकार की देरी के लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।





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