नई दिल्ली/लखनऊ: भारत सरकार मिट्टी की सेहत सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए उर्वरक क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है। वर्ष 2026 से बाजार में यूरिया का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। अब किसानों को 45 किलो की जगह 40 किलो का यूरिया बैग मिलेगा, जिसे 'यूरिया गोल्ड' के नाम से जाना जाएगा।
📌 वजन घटा, लेकिन गुणवत्ता बढ़ी
अभी तक किसान 45 किलो का यूरिया बैग इस्तेमाल करते आ रहे हैं, लेकिन नए नियमों के तहत अब इसमें पोषक तत्वों का संतुलन बदला गया है। नए 40 किलो के बैग की संरचना इस प्रकार होगी:
- नाइट्रोजन (Nitrogen): 37%
- सल्फर (Sulphur): 17%
- निर्धारित मूल्य: ₹254 प्रति बैग
📌 क्यों खास है 'यूरिया गोल्ड'?
यह साधारण यूरिया नहीं, बल्कि सल्फर कोटेड यूरिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय मिट्टी में सल्फर की भारी कमी है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। इस नए बदलाव के मुख्य फायदे ये हैं:
- मिट्टी का उपचार: सल्फर मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखता है।
- कम खपत: सल्फर कोटेड होने के कारण यूरिया मिट्टी में धीरे-धीरे घुलता है (Slow Release), जिससे पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता है और बर्बादी कम होती है।
- बेहतर पैदावार: नाइट्रोजन और सल्फर का सही मिश्रण फसल की गुणवत्ता और चमक को बढ़ाता है।
📌 यूरिया बैग का सफर: 50kg से 40kg तक
यूरिया बैग के वजन में यह तीसरा बड़ा बदलाव है:
- पुराना दौर: यूरिया का बैग 50 किलो का होता था।
- वर्तमान: फिलहाल 45 किलो का बैग प्रचलन में है।
- भविष्य (2026): अब 40 किलो का 'स्मार्ट बैग' खेती की नई पहचान बनेगा।
📌 किसानों के लिए क्या है खास?
सरकार ने इस 40 किलो के बैग की कीमत ₹254 तय की है। हालांकि बैग का वजन कम हुआ है, लेकिन इसमें सल्फर की मौजूदगी के कारण किसानों को अलग से सल्फर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनकी लागत में कमी आएगी।
उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। 2026 तक बाजार में पुराने स्टॉक की जगह ये नए 40 किलो वाले यूरिया गोल्ड बैग पूरी तरह उपलब्ध हो जाएंगे।
📝 निष्कर्ष
सरकार का यह कदम 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' और मिट्टी के स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। किसानों को अब कम मात्रा में खाद का उपयोग कर अधिक और बेहतर फसल लेने में मदद मिलेगी।


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