नई दिल्ली: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर देशभर के लाखों शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि सभी सेवारत शिक्षकों पर टीईटी लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं।
12 लाख शिक्षकों की आजीविका का सवाल
बृहस्पतिवार को दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने चिंता जताई कि यदि टीईटी को सभी पुराने शिक्षकों पर अनिवार्य किया गया, तो देश के लगभग 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, वरिष्ठता और पदोन्नति (Promotion) पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता और महासचिव प्रो. गीता भट्ट ने शिक्षा मंत्री को अवगत कराया कि NCTE की मूल अधिसूचना में यह साफ लिखा है कि कक्षा 1 से 8 तक के लिए निर्धारित योग्यताएं अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होंगी। इसका सीधा अर्थ है कि उस तिथि से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश का नेतृत्व
इस महत्वपूर्ण मुलाकात में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. संजय मेधावी और प्रदेश महामंत्री जोगेन्द्र पाल सिंह भी शामिल थे। यूपी के शिक्षकों के लिए यह खबर इसलिए भी बड़ी है क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में शिक्षक इस नियम से प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा मंत्री का आश्वासन
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संगठन की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और अधिकारियों को इस मामले में शिक्षकों के हित में समुचित कदम उठाने को कहा। इस बैठक में संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, जी लक्ष्मण और महेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।


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