पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी: अब डाकिया घर आकर बनाएगा जीवन प्रमाणपत्र
नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने ईपीएस (EPS) पेंशनधारकों के लिए एक अत्यंत सुविधाजनक सेवा की शुरुआत की है। अब पेंशनभोगियों को अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करने के लिए घर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। 'डिजिटल इंडिया' अभियान को आगे बढ़ाते हुए ईपीएफओ ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के साथ हाथ मिलाया है, जिसके तहत डाकिया खुद घर आकर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) तैयार करेगा।
कैसे काम करेगी यह डोरस्टेप सेवा?
इस योजना के अंतर्गत, पोस्टमैन या डाकसेवक पेंशनर के घर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सत्यापन प्रक्रिया: डाकिया पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) और आधार कार्ड की जानकारी का मिलान करेगा।
- तकनीकी सुविधा: पहचान सुनिश्चित करने के लिए 'फेस ऑथेंटिकेशन' (चेहरा पहचानना) का उपयोग किया जाएगा। यदि चेहरे से पहचान नहीं हो पाती है, तो बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
- पुष्टि: प्रमाण पत्र बनते ही पेंशनर के मोबाइल पर एसएमएस (SMS) प्राप्त होगा और डेटा सीधे जीवनप्रमाण पोर्टल पर अपडेट हो जाएगा।
- नि:शुल्क सेवा: सबसे राहत की बात यह है कि ईपीएफओ ने इस पूरी प्रक्रिया को पेंशनरों के लिए बिल्कुल मुफ्त रखा है।
लंबित मामलों पर विशेष ध्यान
ईपीएफओ ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जो मामले 5 साल या उससे अधिक समय से अटके हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता पर निपटाया जाए। संगठन का लक्ष्य मार्च 2026 तक सभी पुराने लंबित मामलों को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके साथ ही, यदि सत्यापन के दौरान किसी पेंशनर की मृत्यु की सूचना मिलती है, तो उसे तुरंत रिपोर्ट किया जाएगा ताकि पात्र उत्तराधिकारियों को समय पर लाभ मिल सके।
CGHS लाभार्थियों के लिए आयुष बीमा पॉलिसी
इसी के साथ केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक नई मेडिक्लेम आयुष बीमा पॉलिसी की भी घोषणा की है।
- यह योजना 10 लाख से 20 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान करती है।
- इसमें कैशलेस इलाज की सुविधा के साथ-साथ आधुनिक उपचार पद्धतियों को शामिल किया गया है।
- एक पॉलिसी में परिवार के अधिकतम छह सदस्य शामिल हो सकते हैं।
स्वयं भी बना सकते हैं प्रमाण पत्र
ईपीएफओ ने स्मार्टफोन का उपयोग करने वाले सक्षम पेंशनरों को 'जीवनप्रमाण' या 'उमंग' ऐप के माध्यम से स्वयं अपना प्रमाण पत्र बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईपीएफओ की इस पहल से समाज के बुजुर्ग वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवन सुगमता) बढ़ेगी। अब पेंशन रुकने का डर समाप्त होगा और बुजुर्ग सम्मान के साथ अपनी पेंशन प्राप्त कर सकेंगे।


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