नई दिल्ली। इनकम टैक्स विभाग ने नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स की निगरानी और कड़ी कर दी है। दिसंबर 2025 में हजारों टैक्सपेयर्स को SMS और ईमेल अलर्ट भेजे गए हैं, जिनके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और फॉर्म 16 के आंकड़ों में अंतर पाया गया है। अब टैक्स विभाग आधुनिक तकनीक और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए छोटी से छोटी गड़बड़ी भी तुरंत पकड़ रहा है।
क्यों आ रहे हैं टैक्स विभाग के अलर्ट?
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये अलर्ट मुख्य रूप से उन टैक्सपेयर्स को भेजे गए हैं जिन्होंने फॉर्म 16 में कम निवेश दिखाया, लेकिन ITR भरते समय ज्यादा टैक्स छूट का दावा कर दिया।
EQX बिजनेस कंसल्टेंसी के डायरेक्टर नेमिन शाह के मुताबिक, जब कोई टैक्सपेयर असामान्य रूप से बड़ा रिफंड क्लेम करता है, तो सिस्टम तुरंत उसे जांच के दायरे में ले लेता है।
अब एल्गोरिदम पकड़ रहा है गलतियां
SBHS एंड एसोसिएट्स के पार्टनर हिमंक सिंगला बताते हैं कि अब टैक्स रिटर्न की जांच मैन्युअल नहीं होती। विभाग का सिस्टम एल्गोरिदम और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए काम करता है।
यह सॉफ्टवेयर Form 16, Form 26AS, AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) से डेटा लेकर आपस में मिलान करता है। किसी भी तरह का अंतर मिलते ही टैक्सपेयर को अलर्ट भेज दिया जाता है।
इन दावों पर विभाग की खास नजर
इनकम टैक्स विभाग खास तौर पर उन मामलों को जांच रहा है, जहां ज्यादा रिफंड मांगा गया है। इनमें शामिल हैं—
- HRA (मकान किराया भत्ता)
- धारा 80C, 80D, 80E, 80G की छूट
- होम लोन पर ब्याज
- LTA (Leave Travel Allowance)
इन दावों को विभाग बैंकों, बीमा कंपनियों और एम्प्लॉयर के डेटा से क्रॉस-चेक कर रहा है।
अलर्ट का मतलब टैक्स चोरी नहीं
टैक्सपेयर्स के लिए राहत की बात यह है कि ये अलर्ट कोई नोटिस नहीं हैं और न ही इन्हें टैक्स चोरी का मामला माना जाना चाहिए।
इनकम टैक्स कानून के तहत टैक्सपेयर उन छूटों का दावा कर सकता है, जो उसने कंपनी को नहीं बताई थीं—बशर्ते दावे सही और पारदर्शी हों।
नोटिस से बचने के लिए क्या करें टैक्सपेयर?
विशेषज्ञों की सलाह है कि—
- अपने सभी निवेश और खर्च की जानकारी समय पर कंपनी को दें
- सभी जरूरी दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखें
- ITR भरने से पहले Form 16, AIS और TIS का मिलान जरूर करें
- इंश्योरेंस पॉलिसी नंबर, लोन डिटेल और मकान मालिक की जानकारी सही-सही भरें
AIS और TIS कैसे चेक करें?
टैक्सपेयर घर बैठे इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल से AIS और TIS देख सकते हैं।
स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:
1️⃣ incometax.gov.in पर लॉग-इन करें
2️⃣ ‘Services’ टैब पर क्लिक करें
3️⃣ ‘Annual Information Statement (AIS)’ चुनें
4️⃣ ‘Proceed’ पर क्लिक करें
5️⃣ डैशबोर्ड में AIS और TIS देखें
6️⃣ चाहें तो PDF या JSON फॉर्मेट में डाउनलोड करें
AIS में गलती हो तो ऐसे करें सुधार
अगर AIS में कोई गलत जानकारी दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें।
सुधार के स्टेप्स:
- गलत ट्रांजैक्शन चुनें
- ‘Feedback’ विकल्प पर क्लिक करें
- सही कारण चुनें (गलत राशि, डुप्लीकेट एंट्री, अन्य PAN से संबंधित आदि)
- ‘Submit’ करें
फीडबैक देने के बाद TIS अपडेट हो जाती है और विभाग संबंधित बैंक/संस्था से वेरिफिकेशन करता है।
आगे के लिए सबक
साल 2026 और आगे के लिए टैक्सपेयर्स को चाहिए कि रिकॉर्ड्स पारदर्शी रखें और ITR भरने से पहले सभी डेटा का मिलान करें। सही समय पर सही जानकारी देना ही टैक्स विभाग के अलर्ट से बचने का सबसे आसान तरीका है।


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