न्यायालय पैरा 17 और 18 पर केंद्रित**
प्रणाम सभी 72825 के अचयनित भाइयों व बहनों,
जैसा कि बहुचर्चित इस भर्ती प्रकरण के विषय में माननीय जस्टिस संजय करोल व जस्टिस वी. वराले प्रसन्ना जी के बेंच ने दिए गए पूर्व के अंतिम 25 जुलाई 2017 के जजमेंट में उल्लेखित पैरा 17 के उस मुख्य बिंदु को पकड़ लिया है, जो सरकार के गले की फाँस आज से 8 साल पहले भी था और अब वर्तमान में भी है। 😂
कहने का मतलब आगे कुआँ पीछे खाई — नियोक्ता या अथॉरिटी के लिए।
वह मुख्य बिंदु है पैरा 17 का —
“relief has to be moulded in the light of developments that have taken place in the interregnum.”
यही वह फाइनल जजमेंट की लाइन है, जिसे माननीय जस्टिस — न्याय के देवता, स्वयं साक्षात श्रीकृष्ण रूपी संजय करोल — धर्म रूपी ध्वजा पताका फहराने को आतुर हैं। और क्यों न हों, जो आप लोग अधिक अंक पाने के बावजूद लगभग 14 वर्षों से दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। न्याय भी आपके संघर्ष को देखकर पसीज गया। 🙏
जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब अधर्म का विनाश करने के लिए स्वयं नारायण किसी न किसी रूप में यह एहसास कराते हैं कि —
“घबराओ नहीं, मैं आ गया हूँ।”
न्याय के सर्वोच्च एवं सर्वोपरि मंदिर में अब न्याय होगा — इसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं।
5000 वर्ष पहले कुरुक्षेत्र के मैदान में, जब अर्जुन अपनों से बड़े के सामने हथियार डाल दिए थे, तब उसी निर्णायक मैदान में भगवान वासुदेव ने अर्जुन को अपना विहंगम रूप दिखाकर उनकी जिजीविषा को शांत किया था।
आज एक बार फिर जस्टिस संजय करोल ने उसी आदेश की लाइन को गाँठ मार लिया है, जो सरकार की नस की पसली थी।
तमाम आर्गुमेंट और विश्लेषण के आधार पर जज साहब ने कहा है कि —
संख्या 50 हो, 1000 हो, 15000 हो या so many — इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता।
मैं ग्राउंड लेवल पर जाकर देखूँगा कि क्या कुछ हो सकता है। पहले मुझे तीनों नोडल अधिवक्ताओं से क्रॉस-चेक करवाना है कि 16 दिसंबर रात्रि 12 बजे तक कितने लोग दोनों शर्तों को पूरा करते हुए विगत 8 वर्षों से मुझसे न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
अब मैं उनके अश्रु की धारा को जरूर पोंछूँगा। 😰😰
क्योंकि समय परिवर्तनशील है।
सरकारी वकील श्रीमती ऐश्वर्या भाटी मैम भी चुपचाप न्याय के देवता के हर निर्देश को आत्मसात कर रही थीं।
जस्टिस संजय सर ने पैरा 17 के अलावा पैरा 18 के उस पॉइंट को भी माइंड में रखा है, जो सरकार के लिए नासूर की तरह चुभने वाला है।
पैरा 18 में जज साहब ने कहा कि —
जब 66655 लोगों को अंतरिम आदेशों से प्रोटेक्ट करते हैं, सम्मिलित रूप से 1100 में से 839, तो जस्टिस दीपक मिश्रा व जस्टिस यू.यू. ललित जी के आदेशों का भी अनुपालन होना चाहिए था।
क्योंकि “consider” का आदेश —
07 दिसंबर 2015 के बाद,
24 फरवरी 2016,
26 अप्रैल 2016,
28 अगस्त 2016,
और अंततः 25 जुलाई 2017 के अंतिम जजमेंट तक —
पालन नहीं किया गया।
इस मुद्दे को भी जस्टिस संजय जी ने गाँठ मार लिया है।
क्योंकि 839 में से 239 respondent (जो बेचारे हाईकोर्ट से होते हुए आए थे) वे भी नियुक्ति से वंचित हो गए।
जबकि 839 में जनरल 90 नंबर और ओबीसी में 83 नंबर पाकर TET 2011 की न्यूनतम पात्रता मापदंड की धज्जियाँ उड़ा दी गईं। 🤣🤣
अब असली न्याय होगा।
पोस्ट काफी बड़ा हो गया, इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ, मगर जो जिज्ञासा लेखनी में थी, उसे मैं रोक नहीं पाया।
जस्टिस न्याय करेंगे और ऐतिहासिक न्याय करेंगे। 🙏💐
🫴 जिस भाई-बहन को माननीय सुप्रीम कोर्ट से संबंधित कोर्ट आर्गुमेंट की जानकारी चाहिए, वे आज दोपहर 12 बजे से शाम 8 बजे तक दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर सिर्फ मुझे मैसेज कर सकते हैं। 🙏
सबको जवाब दिया जाएगा।
आपका भाई
त्रिपुरेश पांडेय 🙏💐




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