नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों के पहले बैच का सेवाकाल इस वर्ष पूरा होने जा रहा है। जून–जुलाई 2026 के दौरान तीनों सेनाओं के 20 हजार से अधिक अग्निवीर चार साल की सेवा अवधि पूरी कर बाहर होंगे। इसके बाद तय प्रक्रिया के अनुसार 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी सैनिक के रूप में पुनः चयन किया जाएगा।
हालांकि, सेना ने इस प्रक्रिया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम स्पष्ट किया है, जो अग्निवीरों के भविष्य पर सीधा असर डाल सकता है।
शादी करने पर स्थायी भर्ती का मौका खत्म
सेना के अनुसार, यदि कोई अग्निवीर सेवाकाल के दौरान या सेवामुक्ति के तुरंत बाद विवाह करता है, तो वह स्थायी सैनिक बनने के लिए अयोग्य माना जाएगा। स्पष्ट किया गया है कि जब तक स्थायीकरण (Permanent Absorption) की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक विवाह की अनुमति नहीं होगी।
कितने समय तक नहीं कर सकेंगे विवाह
अग्निवीरों की भर्ती आमतौर पर 21 वर्ष की आयु में होती है और चार वर्ष की सेवा के बाद वे लगभग 25 वर्ष की उम्र में सेवामुक्त होते हैं। इसके बाद—स्थायी भर्ती के लिए आवेदन, परीक्षा, मूल्यांकन, अंतिम चयन प्रक्रिया इन सभी चरणों में चार से छह महीने का समय लग सकता है। इस पूरी अवधि में अग्निवीर विवाह नहीं कर सकेंगे। यदि इस बीच उन्होंने विवाह कर लिया, तो वे स्थायी सैनिक के लिए आवेदन करने का अधिकार खो देंगे।
अग्निपथ योजना का नियम पहले से स्पष्ट
सेना ने यह भी दोहराया कि अग्निपथ योजना के तहत सेवाकाल के दौरान विवाह की अनुमति नहीं है, और यह नियम भर्ती के समय ही शर्तों में शामिल किया गया था। अब पहले बैच की सेवामुक्ति के साथ इस नियम का व्यावहारिक असर सामने आ रहा है।
युवाओं के सामने बड़ा फैसला
इस नियम के चलते अग्निवीरों के सामने एक महत्वपूर्ण निर्णय है—
या तो वे तुरंत विवाह करें और स्थायी भर्ती का अवसर छोड़ दें,
या फिर कुछ महीनों का इंतजार कर स्थायी सैनिक बनने की दौड़ में शामिल रहें।
निष्कर्ष
पहले बैच के अग्निवीरों के लिए यह समय निर्णायक है। स्थायी सैनिक बनने की इच्छा रखने वालों को विवाह से संबंधित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। सेना का यह स्पष्ट रुख भविष्य में किसी भी भ्रम या विवाद को रोकने के उद्देश्य से लिया गया कदम माना जा रहा है।


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