प्रयागराज। परिषदीय शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर पिछले कई महीनों से बनी अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है। उत्तर प्रदेश शासन के उप सचिव आनंद कुमार सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शिक्षकों का स्थानांतरण पहले से लागू नियमावली के अनुसार ही किया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इसमें किसी प्रकार का नया बदलाव नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त एक प्रकरण के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की। जांच के दौरान यह तथ्य उभरकर सामने आया कि स्थानांतरण कोई अधिकार नहीं, बल्कि यह प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर लिया जाने वाला निर्णय है। इसलिए, किसी भी प्रकार का स्थानांतरण केवल तभी संभव है, जब उसका औचित्य प्रशासनिक दृष्टि से सिद्ध हो।
शासन द्वारा जारी पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिक्षक का स्थानांतरण उसी जिले या निर्धारित क्षेत्र में किया जाएगा, जैसा कि पूर्व नियमावली में स्पष्ट रूप से परिभाषित है। विभाग ने यह भी दोहराया कि नियमों के विपरीत या मनमानी तरीके से कोई स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।
अधिकारीयों ने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्थानांतरण से संबंधित अपेक्षाओं को लेकर निर्धारित नियमों पर ही विश्वास रखें, क्योंकि शासन किसी भी अनधिकृत या नियम-विरुद्ध प्रक्रिया को मंज़ूरी नहीं देगा।


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