लेखपाल भर्ती के विज्ञापन में किए गए आरक्षण संशोधन को लेकर प्रतियोगी छात्रों के एक वर्ग ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। छात्रों का कहना है कि आरक्षण में किए गए बदलाव से अनारक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है।
जानकारी के अनुसार, 16 दिसंबर को जारी मूल विज्ञापन में कुल 7994 पदों में से
- अनारक्षित वर्ग: 4165 पद
- अनुसूचित जाति (SC): 1446 पद
- अनुसूचित जनजाति (ST): 150 पद
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 1441 पद
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 792 पद
निर्धारित किए गए थे।
हालांकि, संशोधित विज्ञापन में इन्हीं 7994 पदों का वर्गवार वितरण बदल दिया गया। संशोधन के बाद—
- अनारक्षित वर्ग: 3205 पद
- SC: 1697 पद
- ST: 160 पद
- OBC: 2158 पद
- EWS: 792 पद
कर दिया गया है।
इस संशोधन के विरोध में प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी एवं छात्र आंदोलन समन्वय समिति के संयोजक प्रशांत पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। पत्र में सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि पहले जारी किया गया विज्ञापन किस आधार पर गलत था और यदि उसमें त्रुटि थी, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई।
छात्र नेताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि संशोधित विज्ञापन में अनारक्षित वर्ग के पदों की संख्या किस आधार पर घटाई गई। उनका आरोप है कि सरकार राजनीतिक दबाव में आकर अनारक्षित वर्ग के मेधावी छात्रों के अधिकारों का हनन कर रही है।
प्रतियोगी छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूर्व में जारी विज्ञापन के अनुसार नहीं कराई गई, तो वे न्यायालय की शरण लेने और व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस मुद्दे पर प्रदेशभर में छात्रों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में विरोध तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

