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संशोधित आयकर रिटर्न भरना सभी के लिए जरूरी नहीं, जानिए आयकर विभाग का पूरा संदेश

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। हाल के दिनों में आयकर विभाग की ओर से बड़ी संख्या में करदाताओं को एसएमएस और ई-मेल के जरिए संदेश भेजे गए हैं। इन संदेशों में बताया गया है कि कुछ मामलों में करदाताओं द्वारा दाखिल की गई आयकर रिटर्न की जानकारी, विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों से मेल नहीं खा रही है। इसके कारण कई करदाताओं का इनकम टैक्स रिफंड रोका गया है और आवश्यकता पड़ने पर संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी गई है। इससे लोगों के बीच यह भ्रम पैदा हो गया है कि क्या सभी करदाताओं को दोबारा रिटर्न भरनी होगी।

संशोधित आयकर रिटर्न भरना सभी के लिए जरूरी नहीं

डरने की जरूरत नहीं, यह नोटिस नहीं है

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर विभाग का यह संदेश न तो नोटिस है और न ही जुर्माने की चेतावनी। इसका उद्देश्य करदाताओं को डराना नहीं, बल्कि उन्हें समय रहते अपनी रिटर्न में हुई संभावित गलतियों को सुधारने का मौका देना है। जिन करदाताओं ने सही जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल की है, उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

गलती होने पर ही भरें संशोधित रिटर्न

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उन्हीं मामलों में संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करनी चाहिए, जहां अनजाने में कोई गलती हो गई हो। समय रहते संशोधन करने से न केवल रिफंड जल्दी मिल सकता है, बल्कि भविष्य में नोटिस या जांच की स्थिति से भी बचा जा सकता है

31 दिसंबर की समयसीमा क्यों है महत्वपूर्ण

आयकर कानून के अनुसार, चालू आकलन वर्ष के लिए 31 दिसंबर तक संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल की जा सकती है। इस समयसीमा के भीतर रिटर्न में हुई गलतियों को सुधारा जा सकता है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि करदाता अब टैक्स अनुपालन को लेकर पहले से अधिक सजग हो रहे हैं।

करदाताओं को क्या करना चाहिए

करदाताओं को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए—

  • अपनी आयकर रिटर्न को एआईएस (AIS) और फॉर्म 26एएस से मिलान करें
  • आय, निवेश और कटौती से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करें
  • यदि कोई गलती पाई जाए, तो 31 दिसंबर से पहले संशोधित रिटर्न दाखिल करें
  • यदि सभी विवरण सही हैं, तो फिलहाल कोई बदलाव न करें और प्रतीक्षा करें

कब जरूरी है संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करना

संशोधित आयकर रिटर्न तब दाखिल करना आवश्यक होता है, जब—

  • रिटर्न में दी गई जानकारी और विभागीय रिकॉर्ड में अंतर हो
  • ऐसी कटौती या छूट का दावा किया गया हो, जो एआईएस या फॉर्म 26एएस में दर्ज न हो
  • ब्याज, लाभांश, वेतन या अन्य आय गलत या कम दिखाई गई हो
  • दान या निवेश से संबंधित पैन नंबर या राशि में त्रुटि हो

ऐसे मामलों में समय रहते संशोधित रिटर्न दाखिल करना आगे चलकर पेनल्टी या कानूनी कार्रवाई से बचा सकता है।

आयकर विभाग का संदेश केवल एक सावधानी सूचना है। सही जानकारी देने वाले करदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, जबकि जिनसे भूलवश गलती हुई है, उन्हें तय समयसीमा में संशोधित रिटर्न दाखिल कर लेनी चाहिए।

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