बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की एक साधारण प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका ने अपने दृढ़ संकल्प और सेवा भाव से ग्रामीण समाज में एक असाधारण परिवर्तन की नींव रख दी है। यह शिक्षिका आज केवल बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं। लोग उन्हें सम्मान के साथ “पैड वुमन” के नाम से जानते हैं।
भदपुरा ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय बौरैया में कार्यरत शिक्षिका राखी गंगवार ने “हमारी किशोरी हमारी शक्ति पैड बैंक” नामक पहल की शुरुआत की। इस अभियान की शुरुआत उन्होंने अपने निजी खर्च से की, जब उन्होंने गाँव की महिलाओं और किशोरियों को सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी इस मुहिम को समाज और विभिन्न संस्थाओं का सहयोग मिलने लगा।
55 से अधिक गाँवों तक पहुँची जागरूकता की मुहिम
राखी गंगवार की इस पहल से हर महीने 100 से 150 से अधिक महिलाएँ नियमित रूप से लाभान्वित हो रही हैं। अब तक वे 55 से अधिक गाँवों में 20 हजार से ज्यादा महिलाओं और किशोरियों तक मासिक धर्म स्वच्छता का संदेश पहुँचा चुकी हैं। उनका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों को “कपड़ा मुक्त” बनाना है, जिससे अस्वच्छ कपड़ों के उपयोग से होने वाले संक्रमण और बीमारियों से महिलाओं को बचाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2025 के अवसर पर लखनऊ में उन्हें “नारी शक्ति सम्मान” से सम्मानित किया गया। मीडिया में भी उनके प्रयासों की व्यापक सराहना हो रही है और उन्हें वास्तविक जीवन की ‘Pad Woman’ कहा जा रहा है।
हजारों महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
एक शिक्षिका होने के साथ-साथ राखी गंगवार आज एक सामाजिक कार्यकर्ता और प्रेरक वक्ता के रूप में भी पहचान बना चुकी हैं। उनकी पहल से ग्रामीण महिलाएँ अब मासिक धर्म को लेकर खुलकर बात कर रही हैं और बिना झिझक सैनिटरी पैड का उपयोग कर रही हैं।
निस्संदेह, राखी गंगवार का यह प्रयास महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मजबूत और प्रेरणादायक कदम है, जो समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहा है।

