बरेली। विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर बढ़ते दबाव और मानसिक तनाव का एक और मामला सामने आया है। बरेली जिले में BLO के रूप में कार्यरत सर्वेश गंगवार की हार्टअटैक से मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन पर लगातार काम का अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा था और कुछ अधिकारी उन्हें गाली-गलौज और डराने-धमकाने के माध्यम से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
परिजनों का आरोप: “लगातार टॉर्चर किया जा रहा था”
मृतक सर्वेश गंगवार के परिवार का कहना है कि
- वे कई दिनों से SIR ड्यूटी के कारण तनाव में थे
- अधिकारियों द्वारा बार-बार फोन कर दबाव बनाया जा रहा था
- उनसे असंभव समय-सीमा में काम पूरे करने को कहा जाता था
- परिजन का आरोप है कि कुछ अधिकारी गाली देकर और धमकाकर उन्हें परेशान करते थे
परिजनों का दावा है कि इसी मानसिक दबाव और तनाव की वजह से उन्हें हार्टअटैक आया।
SIR के दौरान शिक्षकों और BLO पर बढ़ा दबाव
उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान हजारों शिक्षक और कर्मचारी BLO के रूप में तैनात हैं।
पिछले कुछ दिनों में कई जिलों से
- अत्यधिक काम
- समय-सीमा का दबाव
- और ऊपरी अधिकारियों के व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।
कुछ शिक्षक संगठनों ने कहा है कि BLO कार्य के दौरान कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण और समय नहीं दिया जाता, जिसके चलते वे तनाव में रहते हैं।
अधिकारियों ने शुरू की जांच
मामले के सामने आते ही जिला प्रशासन ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों ने कहा—
- सभी आरोपों की जांच की जाएगी
- परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे
- आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी
हालांकि प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ पाएगा।
शिक्षक संगठनों ने उठाई आवाज
घटना के बाद शिक्षक संगठनों ने
- BLO ड्यूटी से शिक्षकों को मुक्त करने
- SIR कार्य को सरल करने
- और BLO पर लगाए जा रहे अतिरिक्त दबाव को हटाने
की मांग उठाई है।
संगठनों का कहना है कि लगातार ऐसे मामलों के सामने आने से स्पष्ट है कि BLO प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
बरेली के BLO सर्वेश गंगवार की मौत ने एक बार फिर SIR अभियान में लगे कर्मचारियों पर बढ़ते मानसिक तनाव और दबाव को उजागर किया है।
परिजनों के गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अधिकारियों की भूमिका क्या रही, लेकिन फिलहाल यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।


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