बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग की मध्याह्न भोजन (Mid Day Meal – MDM) योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। विभागीय जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग 11 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान और हेरफेर किया गया। मामले के खुलासे के बाद बीएसए शुभम शुक्ला की तहरीर पर पुलिस ने जिला एमडीएम समन्वयक फिरोज अहमद खान सहित 44 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपियों में तीन मदरसों के प्रधानाध्यापक, पाँच ग्राम प्रधान और पाँच परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक शामिल हैं।
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| सांकेतिक चित्र |
ऐसे खुला बड़ा घोटाला
कुछ विद्यालयों ने बीएसए से शिकायत की कि उन्हें MDM कन्वर्जन कास्ट कम मिल रही है।
इस पर बीएसए ने PFMS (Public Financial Management System) पोर्टल पर भुगतान की जांच कराई।
डाटा खंगालने पर पाया गया कि जिन स्कूलों और मदरसों में बच्चे कम थे—या कहीं-कहीं विद्यार्थी थे ही नहीं—उन्हें भी पूरी राशि जारी की जा रही थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि:
- फर्जी उपस्थिति दिखाकर पैसा जारी किया गया
- राशन का उपभोग दिखाए बिना आवंटन कराया गया
- मदरसों और परिषदीय विद्यालयों से मिलीभगत से वर्षों तक यह खेल चलता रहा
बीएसए ने बताया कि केवल पहले चरण की जांच में ही 11 करोड़ रुपये की अनियमितता मिली है। आरोपियों की संख्या 100 से अधिक होने की आशंका है।
कितना बड़ा है स्कूल–मदरसों और अधिकारियों का गठजोड़?
- जिला समन्वयक फिरोज अहमद 2008 से तैनात बताए जा रहे हैं।
- आशंका है कि कन्वर्जन कास्ट के अलावा खाद्यान्न व अन्य बजट में भी घोटाला हुआ है।
- बिना राशन खारिज किए कन्वर्जन कास्ट जारी नहीं हो सकता — यानी कई स्तरों पर अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं।
सूत्रों के अनुसार घोटाले का नेटवर्क बहुत बड़ा है और जांच आगे बढ़ने पर संख्या 100 से पार जा सकती है।
किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी?
MDM योजना सीधे विद्यार्थियों से जुड़ी है और इसका संचालन जिले के उच्चाधिकारियों की कड़ी निगरानी में होता है।
इसके बावजूद—
- रोजाना MDM फीडिंग होती है
- हर साल ऑडिट होता है
- DM की अध्यक्षता वाली कमेटी की स्वीकृति पर बजट जारी होता है
इसके बाद भी 5 वर्ष तक करोड़ों रुपये का घोटाला चलता रहा।
यह स्पष्ट करता है कि बिना विभागीय अधिकारियों के सहयोग के यह संभव नहीं था।
रात में छापेमारी, कई लोग हिरासत में
सूत्रों के मुताबिक:
- मंगलवार देर रात एसपी विकास कुमार ने एक विशेष टीम बनाकर छापेमारी कराई।
- पचपेड़वा और गैसड़ी क्षेत्र से जिला समन्वयक फिरोज अहमद और अन्य संदिग्धों को उठाया गया।
- एटीएस और एसटीएफ की टीमों की मौजूदगी की चर्चा भी पूरे जिले में फैल गई थी।
दोपहर तक DM ने बीएसए और वित्त एवं लेखाधिकारी को बुलाकर संपूर्ण रिपोर्ट देखी और FIR के आदेश दिए।
विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता
सेवानिवृत्त सहायक शिक्षा निदेशक फतेह बहादुर सिंह ने कहा:
“MDM सबसे गंभीर योजनाओं में से एक है। 30 सितंबर की छात्र संख्या के आधार पर बजट जारी होता है। पांच साल तक घोटाला चलता रहा—यह गंभीर विभागीय लापरवाही है।”
पुलिस: बड़े खुलासों की तैयारी
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने कहा:
“FIR दर्ज कर ली गई है। पूछताछ जारी है। यह बड़ा मामला है।
आने वाले दिनों में बड़े खुलासे होंगे और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी की जाएगी।”


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