लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने किशोर बच्चों को यौन स्वास्थ्य एवं किशोरावस्था शिक्षा देने में केंद्र और राज्य सरकारों की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दोनों सरकारों की तरफ से समय पर जवाब न दाखिल किए जाने पर 15-15 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

📌 कोर्ट पहले भी मांग चुका था विस्तृत जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि किशोरों में यौन स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए।
कोर्ट के निर्देश पर राज्य के सहायक सचिव प्रेम चंद्र कुशवाहा ने हलफनामा दाखिल किया, लेकिन पीठ उससे संतुष्ट नहीं हुई और उस पर 15 हजार रुपये हर्जाना कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया।
📌 जनहित याचिका में क्या कहा गया?
यह आदेश नैतिक पार्टी की ओर से विवेक कुमार सिंह व एक अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया गया।
याचिका में मांग की गई थी कि—
- केंद्र सरकार की किशोरावस्था शिक्षा योजना 2005
- प्रदेश में पर्याप्त जागरूकता और प्रभावी तरीके से लागू की जाए
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय ने बताया कि 10 से 18 वर्ष के किशोरों में शारीरिक और मानसिक परिवर्तन तेज़ी से आते हैं। ऐसे में यौन स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य और सुरक्षित व्यवहार के बारे में उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।
📌 योजना लागू नहीं होने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अधिवक्ता ने बताया कि स्कूलों और कॉलेजों में किशोरावस्था शिक्षा योजना लागू करने के स्पष्ट प्रावधान हैं, फिर भी उत्तर प्रदेश में इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया।
इसी आधार पर कोर्ट से इसे पूरी तरह लागू करने के निर्देश मांगे गए।
📌 कोर्ट का निर्देश
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने आदेश देते हुए कहा—
- केंद्र और यूपी सरकारें समय पर जवाब नहीं दे रही हैं
- यह गंभीर विषय है
- किशोरों में यौन स्वास्थ्य जागरूकता बेहद जरूरी है
कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए मामले को 15 दिसंबर 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

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