यूपी के स्कूलों में मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए शुरू हुआ बड़ा अभियान, शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक से लेकर इंटरमीडिएट स्तर तक के स्कूलों में अब बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने और किताबों की ओर आकर्षित करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों में किताब पढ़ने की आदत, तार्किक सोच, और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करना है।
📘 हर सप्ताह छात्रों को दी जाएगी एक नई किताब
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे हर सप्ताह छात्रों को पाठ्यक्रम से अलग एक पुस्तक अवश्य दें।
इन पुस्तकों में कहानी, उपन्यास, जीवनी या प्रेरणादायक साहित्य शामिल होगा।
इससे छात्रों की रुचि किताबों में बढ़ेगी और वे मोबाइल या सोशल मीडिया से दूर रहेंगे।
🏫 पुस्तकालयों में मिलेगा विशेष प्रवेश
जिला पुस्तकालयों को स्कूल के बच्चों के लिए मुफ़्त प्रवेश और उपयोग की अनुमति दी जाएगी।
शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रमों में अब पुस्तकालय भ्रमण को भी शामिल किया जाएगा,
ताकि बच्चे पुस्तकालय की उपयोगिता और संरचना को समझ सकें।
🎙️ प्रार्थना सभा में साझा करेंगे पुस्तक अनुभव
प्रत्येक छात्र को अपने द्वारा पढ़ी गई पुस्तक का सारांश या अनुभव प्रार्थना सभा में प्रस्तुत करना होगा।
इससे छात्रों की अभिव्यक्ति क्षमता, आत्मविश्वास और पठन कौशल में सुधार होगा।
शिक्षक भी किताबें पढ़कर छात्रों को प्रेरित करेंगे।
📰 विद्यार्थी करेंगे स्कूल मैगज़ीन का संपादन
हर विद्यालय को अपनी मैगज़ीन प्रकाशित करनी होगी,
जिसका संपादन और सामग्री लेखन छात्रों द्वारा किया जाएगा।
इससे उनकी लेखन कला और सृजनशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा।
🎁 अब बुक बनेगी सम्मान का प्रतीक
शिक्षा विभाग ने यह भी तय किया है कि
अब किसी भी कार्यक्रम या प्रतियोगिता में विजेता छात्र को गुलदस्ता या ट्रॉफी की जगह एक अच्छी किताब दी जाएगी।
हर महीने सबसे ज़्यादा किताबें पढ़ने वाले छात्र को विद्यालय की ओर से प्रशंसा पत्र मिलेगा।
👨🏫 अभियान की निगरानी और उद्देश्य
अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा ने इस अभियान के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
उनका कहना है कि यह पहल बच्चों में पठन संस्कृति को मजबूत करेगी और डिजिटल निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगी।
यह नया अभियान न केवल विद्यार्थियों में किताबों के प्रति प्रेम बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें मोबाइल व्यसन से मुक्त कर उनकी सोचने-समझने की क्षमता को भी सशक्त करेगा। शिक्षा विभाग का यह कदम प्रदेश के लाखों बच्चों के मानसिक और शैक्षिक विकास की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।

