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बेसिक शिक्षकों के 10 साल पहले जो प्रमोशन हुए, वे भी निरस्त होने लगे

Sir Ji Ki Pathshala

बेसिक शिक्षकों के 10 साल पहले जो प्रमोशन हुए, वे भी निरस्त होने लगे

लखनऊ: बेसिक शिक्षकों के 10 साल से प्रमोशन नहीं हुए। प्रमोशन का इंतज़ार कर रहे शिक्षकों को एक बड़ा झटका और लगा है। जो प्रमोशन 10 साल पहले हुए थे, वे भी निरस्त होने शुरू हो गए हैं। इसकी शुरुआत बुलंदशहर से हुई है।

कोई बुलंदशहर में निरस्त हुए बेसिक शिक्षक के तबादले, कोर्ट के आदेश के बाद बड़ी संख्या वरिष्ठता सूची के आधार पर 111 कर्मचारियों पर निरस्त करने का आदेश दिया गया है। इसलिए यहाँ भी खतरा बढ़ गया।

प्रमोशन: प्रदेश में 2016 से अब तक प्रमोशन नहीं हुए हैं। इसके बाद 2018 में प्रमोशन के आदेश द्वारा प्रक्रिया भी शुरू हुई। इसे भी बीच में जूनियर से भी टीईटी अनिवार्य करने का आदेश हो गया। अब शिक्षक कोर्ट को चले गए। इसी विवाद के कारण तबादलों पर रोक लगी गई। तब से प्रमोशन के लिए माँग भी उठ रही है। विभाग ने भी कई बार वरिष्ठता की लेकिन प्रमोशन नहीं हो सका। दरअसरल, 2011 में आरटीई लागू हुआ। उसके बाद से टीईटी अनिवार्य किया गया। जो शिक्षक पहले से भर्ती हैं, उनमें से कुछ जूनियर टीईटी उत्तीर्ण कर लिया है। वही कुछ ने नहीं किया है। ऐसे में जब भी प्रमोशन की बात हुई तो इसी पर विवाद खड़ा होता रहा कि प्रमोशन के लिए टीईटी अनिवार्य होगा चाहिए या नहीं? यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँचा। हालाँकि अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रमोशन के लिए भी टीईटी अनिवार्य है।

क्यों निरस्त हुए प्रमोशन? 

दर असल पिछले 10 साल से शिक्षकों के प्रमोशन नहीं हो सके। अब 2015 के प्रमोशन निरस्त होने का नया विवाद सामने आ गया है। बुलंदशहर के कुछ शिक्षक हाईकोर्ट गए थे। उनका तर्क था कि जो वरिष्ठता सूची बनाई गई थी वह गलत थी। कार्यरत ग्रहण करने की तारीख को आधार मानते हुए वरिष्ठता सूची बनाई गई। इसी के आधार पर प्रमोशन हुए। बेसिक शिक्षा नियमावली के अनुसार, नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता सूची बननी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने नियमावली के आधार पर वरिष्ठता सूची बनाने और मामूलन निरस्त करने के बाकी जिलों में भी चिंता बढ़ी

अब बाकी जिलों में भी शिक्षकों को यह चिंता सता रही है कि कोर्ट के इस फैसले का असर उनके प्रमोशन पर भी न पड़ जाए। ज़्यादातर जिलों में कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से ही वरिष्ठता सूची बनाई गई थी। बुलंदशहर की तरह किसी भी अन्य ज़िले में कोई कोर्ट चला गया या इस फैसले को आधार मानकर विभाग ने स्वयमेव निरस्त कर दिया है तो वहाँ भी तबादले निरस्त हो सकते हैं।

बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने माँग कि वरिष्ठता सूची गलत बनी थी। उस समय बुलंदशहर में 415 शिक्षकों के प्रमोशन हुए थे। उनमें से 111 अभी कार्यरत हैं। बाकी रिटायर हो गए। ऐसे में कार्यरत 111 शिक्षकों का प्रमोशन निरस्त कर दिया गया।

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