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12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का दूसरा चरण आज से शुरू

Sir Ji Ki Pathshala

देशभर में मतदाता सूची को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है। अब बिहार के बाद, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, गुजरात, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में 7 फरवरी 2026 तक यह कवायद चलेगी। इसमें लगभग 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे।

SIR Special Intensive Revision

प्रमुख बिंदु

  • इन सभी राज्यों में सोमवार आधी रात से मतदाता सूचियां फ्रीज कर दी गईं हैं। अब एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने तक कोई नया नाम जोड़ा या हटाया नहीं जाएगा।
  • SIR प्रक्रिया के तहत वर्तमान मतदाताओं को बीएलओ (Booth Level Officer) द्वारा गणना प्रपत्र दिए जाएंगे।
  • मतदाता इन गणना प्रपत्रों से यह मिलान कर पाएंगे कि उनका या उनके माता-पिता का नाम 2002-04 की विशेष सूची में था या नहीं; अगर नाम मिल जाए, तो अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देने होंगे।
  • जिन नागरिकों ने अभी तक सूची में नाम नहीं जुड़वाया है, उनके लिए फार्म-6 उपलब्ध रहेगा।घर-घर सत्यापन BLO द्वारा तीन बार किया जाएगा और फॉर्म-6/घोषणा-पत्र जमा किए जाएंगे।
  • ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 8-9 दिसंबर 2025 को प्रकाशित होगी, जिस पर 8 जनवरी 2026 तक आपत्ति जताई जा सकती है। अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी।

राजनीतिक विवाद

SIR प्रक्रिया का विपक्षी दलों ने विरोध किया है। कांग्रेस समेत कई दलों ने SIR की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग कुछ राज्यों में मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश कर सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के इन तर्कों को सिरे से खारिज किया है और कहा कि ये वही दल हैं जो अलग-अलग राज्यों में पुनरीक्षण की मांग करते रहे हैं।

प्रक्रिया का उद्देश्य

भारतीय निर्वाचन आयोग का कहना है कि SIR के ज़रिए हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज करना, फर्जी नाम हटाना और त्रुटिरहित, पारदर्शी सूची प्रस्तुत करना मुख्य ध्येय है। पिछले SIR के बाद पहली बार देश के इतने राज्यों में एक साथ यह कवायद हो रही है।

निष्कर्षSIR 2.0 से मतदाता सूचियों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बेहतर बनाने की बड़ी पहल की जा रही है। इससे आगामी चुनावों में मतदाता सूची से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी और लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी

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