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भारत में निजी एवं सरकारी स्कूलों में अभिभावकों के मुख्य अधिकार, जो RTE 2009, राज्य शिक्षा नियमों, की गाइडलाइंस से तय होते हैं।

Sir Ji Ki Pathshala

भारत में निजी एवं सरकारी स्कूलों में अभिभावकों के मुख्य अधिकार, जो RTE 2009, राज्य शिक्षा नियमों, की गाइडलाइंस से तय होते हैं।

ये है भारत में निजी एवं सरकारी स्कूलों में अभिभावकों के मुख्य अधिकार की सूची, जो कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act), राज्य शिक्षा नियमों और CBSE/ICSE या राज्य बोर्ड की गाइडलाइंस से तय होते हैं।

  • शिक्षा और जानकारी का अधिकार - कक्षा 1 से 8 तक — RTE Act, Section 3 के तहत निजी स्कूलों में 25% EWS (निःशुल्क फीस) आरक्षण और सरकारी स्कूलों में बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा दिलवाने का अधिकार।
  • बच्चे की शैक्षणिक प्रगति, उपस्थिति, और आचरण के बारे में पूरी जानकारी पाने का अधिकार।
  • स्कूल की फीस, नियम, गतिविधियों और नीतियों की जानकारी लिखित रूप में प्राप्त करने का अधिकार।
  • बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव, मानसिक या शारीरिक दंड न हो। सुरक्षित माहौल — स्कूल को POCSO Act और Child Protection Policy का पालन करना अनिवार्य है।
  • स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) में भाग लेने का अधिकार (RTE के अनुसार प्राथमिक स्तर पर SMC में 75% सदस्य अभिभावक होते हैं)। अभिभावक–शिक्षक बैठक (PTM) में शामिल होकर सुझाव देने और सवाल पूछने का अधिकार।
  • स्कूल की फीस स्ट्रक्चर पहले से जानने और बिना अनुमति अतिरिक्त शुल्क न देने का अधिकार। बोर्ड एग्जाम फॉर्म, ट्रांसफर सर्टिफिकेट, मार्कशीट आदि समय पर पाने का अधिकार।
  • यदि स्कूल RTE, बोर्ड या राज्य शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन करे, तो अभिभावक शिक्षा विभाग, बाल अधिकार आयोग या अदालत में शिकायत कर सकते हैं।