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आनलाइन उपस्थिति का विरोध परिषदीय शिक्षक क्यों कर रहे हैं ? इस पोस्ट को जरूर पढ़ें।

Sir Ji Ki Pathshala

आनलाइन उपस्थिति का विरोध परिषदीय शिक्षक क्यों  कर रहे हैं ? इस पोस्ट को जरूर पढ़ें।

हमारा उद्देश्य विभागीय कार्यों में अवरोध उत्पन्न करना नहीं। यदि ऐसा होता पिछले कई वर्षों से शिक्षक / शिक्षिकाएं अपने व्यक्तिगत मोबाइल / सिम / डाटा से विभागीय कार्य नहीं कर रहे होते। डी०बी०टी० जैसी योजना जमीन पर न उतर पाती। हमारा स्मार्टफोन जो व्यक्तिगत उद्देश्य से खरीदा गया था केवल विभागीय एप / डाटा से पटा पड़ा है। बिना कवजन कास्ट व बिना फल लागत के भी एम०डी०एम० बाधित नहीं हुआ और स्कूल के बाद भी सरकारी कार्य करते हैं। आनलाइन उपस्थिति का भी विरोध नहीं, आनलाइन उपस्थिति लेने से पूर्व अनुकूल वातावरण का सृजन करें:

👉 बेसिक शिक्षक दूर दराज के जिस भौगोलिक / सामाजिक परिवेश में काम करते हैं उसका ध्यान नहीं रखा गया।

👉 आनलाइन उपस्थिति लेने से पूर्व सारे गैर शैक्षकणिक कार्य क्यों नहीं बन्द करवाये गये।

👉 विद्यालय अवधि में विद्यालय से सम्बन्धित बहुत कार्य ऐसे होते हैं जिनके लिए विद्यालय से बाहर जाना ही पड़ेगा जैसे एम०डी०एम० / गैस की व्यवस्था, बैंक आदि।


👉 अब तो अधिकतर अवकाशों में विद्यालय खोले जा रहे हैं जिसका कोई प्रतिकर अवकाश भी नहीं दिया जा रहा है। कोई छुट्टी आती नहीं कि विद्यालय खोलने की योजना पहले बन जाती है।

👉 प्रतिदिन विभिन्न कार्यों को करने हेतु आदेशों की भरमार है। शिक्षक एक आदेश पढ नहीं पाता कई आदेश क्यू में लगे होते हैं जो कहीं न कहीं पठन पाठन को बाधित करते हैं।

👉 आकस्मिक स्थिति के लिए कर्मियों की भांति हाफ डे लीव होना चाहिए।

👉 अर्जित अवकाश की व्यवस्था न होने से शिक्षक अपना विवाह / पुत्र-पुत्रियों का विवाह आदि चिकित्सीय अवकाश लेकर कर रहे हैं। वर्षों से शिक्षक अर्जित अवकाश मांग रहे हैं चाहे ग्रीष्मावकाश में कटौती ही क्यों न हो।

👉 सरकारी कर्मियों के लिए सामूहिक बीमा अनिवार्य है, हमारे लिए जोखिम क्यों? सा०बीमा में वेतन आयोग क्रम में जारी शाानादेशों का अनुपालन 14 साल बाद भी नहीं हुआ। कौन जिम्मेदार है?

👉 80% प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त कर पदोन्नति के अवसर भी समाप्त कर दिये गये, राज्य कर्मियों की भांति ए.सी.पी. क्यों नहीं। एक ही पद पर 22 वर्ष की संतोषजनक सेवा पर सिर्फ 20% को प्रोन्नत वेतनमान क्यों? सबको क्यों नहीं?

👉 वर्षो से जनपद के अन्दर स्थानान्तरण / पदोन्नति राह देखते देखते आंखें पथरा गयी। इसके लिए दोषी कौन?

👉 राज्य कर्मियों की भांति शिक्षकों की बीमारी के इलाज की कोई सुविधा नहीं।

👉 अभिभावक द्वारा यूनीफार्म / आधार न बनवाने पर, बच्चों को स्कूल न भेजने पर शिक्षक कैसे दोषी ?

👉 बच्चों का आधार न होने, अभिभावक का खाता न होने या खाते में धनराशि न पहुंचने पर ऐसे बच्चों के साथ भेदभाव क्यों, उन्हें सुविधाओं से वंचित रखना क्या यह निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन नहीं। कौन दोषी है ?

👉 क्या जियो लोकेशन आधारित आनलाइन उपस्थिति उनके लिए क्यों नहीं? क्या शिक्षक इमानदारी में अन्य कवल बेसिक शिक्षकों लिए ही जरूरी? जिनको वाहन भत्ता तक दिया जाता है / कर्मियों से अधिक भ्रष्ट हैं?

👉 व्यक्तिगत संशाधनों जैसे व्यक्तिगत मोबाइल / सिम आदि का उपयोग नहीं करना चाहते। व्यक्तिगत डाटा की गोपनीयता / सुरक्षा एक महत्वपूर्ण पहलू है। प्रेरणा ऐप को बनाने वाली कम्पनी कह रही है कि एप इन्स्टाल करने पर अपने व्यक्तिगत मोबाइल का पूरा डाटा उससे शेयर करना होगा। कम्पनी यह भी कह रही है कि डाटा सुरक्षा की 100 प्रतिशत की गारण्टी नहीं दी जा सकती। कम्पनी यह भी कह रही है कि 13 वर्ष से कम आयु के बच्चे का डाटा एकत्रित नहीं करती है तो फिर ऐसा क्यों किया जा रहा है। सोचनीय है। 

👉 PM POSHAN भारत सरकार की गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए शिक्षक के पास से एम०डी०एम० बनवाने / रखरखाव की जिम्मेदारी क्यों नहीं हटायी जाती?

👉 संकुल/ब्लाक में होने वाली समीक्षा बैठकें आदि शैक्षणिक कार्य में आता है तो विद्यालय अवधि में बैठक क्यों नहीं होनी चाहिए।

👉 13.02.2019 के शासनादेश के अनुसार सभी एन०पी०एस० खाताधारक शिक्षकों के खाते नियुक्ति तिथि से अब तक ब्याज सहित राज्यांश क्यों नहीं जमा किया गया जबकि महानिदेशक महोदय ने तत्काल अनुपालन का आश्वासन दिया था।

👉 अनुदेशकों/ शिक्षामित्रों को केवल किराया भर का मानदेय दिया जा रहा है क्या इतने मानदेय पर परिवार सरवाइव कर सकता है। वे भी शिक्षण कार्य कर रहे हैं क्यों सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जा रहा है?

👉 शिक्षक शिक्षण योजना बनाने हेतु तैयारी के घण्टे कब दिये जाएंगे? विद्यालय अवधि में एक भी पीरियड खाली नहीं, विद्यालय अवधि के बाद ढेर सारे विभागीय, आनलाइन कार्य, गैर विभागीय कार्य तो शिक्षण योजना कब बनेगी?

विभाग उपरोक्त बिन्दुओं पर गम्भीरता विचार कर समाधान निकाले। आनलाइन उपस्थिति हेतु अनुकूल वातावरण सृजन होने तक हमारा विरोध जारी रहेगा।