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RTE Act: छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों और प्रधानाध्यापक के पदों का क्या है नियम? पदोन्नति को लेकर बढ़ी चर्चा

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 के तहत विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती के मानक निर्धारित किए गए हैं। इसी को लेकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पदों के सृजन तथा शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

RTE Act 2009 के तहत विद्यालयों में शिक्षक संख्या और प्रधानाध्यापक पद के मानक

आरटीई अधिनियम की अनुसूची में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए शिक्षक संख्या तथा शिक्षक-छात्र अनुपात से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं। इन प्रावधानों के आधार पर यह सवाल उठ रहा है कि विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पदों का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा और पदोन्नति प्रक्रिया में इन मानकों की क्या भूमिका होगी।

प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद को लेकर सवाल

आरटीई की अनुसूची के अनुसार, कक्षा 1 से 5 तक के विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती का प्रावधान है। 150 से अधिक विद्यार्थियों वाले प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के अतिरिक्त पांच शिक्षकों का प्रावधान निर्धारित किया गया है।

हालांकि, इस प्रावधान को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या 150 या उससे कम विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद नहीं होगा, अथवा पद सृजन के लिए राज्य सरकार के अलग सेवा नियम और मानक भी लागू होंगे।

उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम तीन शिक्षक

आरटीई अधिनियम की अनुसूची के अनुसार, कक्षा 6 से 8 तक के विद्यालयों में कम से कम प्रत्येक कक्षा के लिए एक शिक्षक तथा निम्नलिखित विषयों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था होनी चाहिए:

  • विज्ञान एवं गणित: इन विषयों के लिए शिक्षक।
  • सामाजिक अध्ययन: सामाजिक अध्ययन पढ़ाने के लिए शिक्षक।
  • भाषा: भाषा विषय के लिए शिक्षक।

इसके अतिरिक्त, प्रत्येक 35 विद्यार्थियों पर कम से कम एक शिक्षक का प्रावधान है। 100 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक तथा निर्धारित विषयों के लिए अंशकालिक शिक्षकों की व्यवस्था का भी उल्लेख है।

पदोन्नति में किन नियमों का होगा पालन?

अब शिक्षकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगामी पदोन्नति प्रक्रिया में प्रधानाध्यापक के पदों का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा। क्या प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद सृजित किया जाएगा या फिर विद्यार्थियों की निर्धारित संख्या के आधार पर ही पद उपलब्ध होंगे?

इसका स्पष्ट उत्तर संबंधित राज्य के लागू सेवा नियमों, स्वीकृत पदों, पद सृजन संबंधी शासनादेशों और विभागीय निर्देशों से ही तय होगा। केवल आरटीई अधिनियम की अनुसूची के आधार पर सभी विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पदों की स्थिति का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

शिक्षकों की नजर सरकार के अगले फैसले पर

प्रधानाध्यापक के पदों के सृजन और पदोन्नति को लेकर शिक्षकों की निगाहें अब शासन के निर्णय पर टिकी हैं। यदि इस विषय पर कोई नया शासनादेश जारी होता है, तो उससे पदों की उपलब्धता और पदोन्नति प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल मुख्य सवाल यही है: क्या सरकार प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद सृजित करने की दिशा में कदम उठाएगी या पद सृजन के लिए निर्धारित छात्र संख्या और स्वीकृत पदों के मानकों को ही आधार बनाया जाएगा? इस पर अंतिम स्थिति संबंधित विभागीय नियमों और आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

RTE Act 2009 के तहत विद्यालयों में शिक्षक संख्या और प्रधानाध्यापक पद के मानक

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