प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक भर्ती-2013 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली दर्जनों याचिकाओं को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रबंधन द्वारा नामित वरिष्ठतम शिक्षकों को सीधी भर्ती के अभ्यर्थियों पर कोई अतिरिक्त या स्वतः वरीयता पाने का अधिकार नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने विभिन्न याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया।
1998 की नियमावली ही चयन का वैध आधार
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2013 में विज्ञापित प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों की मौजूदा चयन प्रक्रिया 'उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड नियमावली, 1998' के प्रावधानों के तहत पूरी की गई है।
अदालत ने कहा कि जब चयन प्रक्रिया 1998 की नियमावली के तहत संचालित हो रही है, तब वर्ष 1983 की पुरानी नियमावली के समय जारी दिशा-निर्देशों या नियमों के आधार पर इस प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी जा सकती। पुराने नियमों के हवाले से दी गई सभी दलीलें कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं हैं।
वरिष्ठता का अर्थ स्वतः चयन नहीं
अदालत ने अपने निर्णय में महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या करते हुए कहा कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा दो वरिष्ठतम शिक्षकों के नाम चयन बोर्ड को भेजे जाने का यह अर्थ कदापि नहीं है कि उन्हें चयन में सीधी भर्ती के सामान्य अभ्यर्थियों के ऊपर कोई विशेषाधिकार या अधिमान दिया जाएगा।
न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि 1998 की नियमावली के अनुसार:
- चयन का एकमात्र आधार अभ्यर्थी द्वारा साक्षात्कार और मूल्यांकन में प्राप्त कुल अंक हैं।
- अंतिम आवंटन अभ्यर्थियों द्वारा दी गई संस्था संबंधी वरीयता (Institutional Preference) और उनकी मेरिट के आधार पर तय होता है।
- वरिष्ठतम शिक्षकों का नामांकन केवल उन्हें चयन प्रक्रिया में प्रतिभाग करने की पात्रता प्रदान करता है, न कि अंतिम मेरिट में कोई अनुचित लाभ।
2013 से लंबित भर्ती के मार्ग की बाधाएं दूर
वर्ष 2013 में शुरू हुई प्रधानाचार्य भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से मुकदमों और विधिक विवादों के भंवर में फंसी हुई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि संस्था के वरिष्ठतम शिक्षकों को चयन में प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
हाईकोर्ट द्वारा इन सभी याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद अब इस भर्ती प्रक्रिया के विधिक विवाद का पटाक्षेप हो गया है, जिससे चयन बोर्ड नियमावली-1998 के तहत तैयार मेरिट सूची के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।


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