लखनऊ। उत्तर प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार ने राज्य में 900 नए न्यायालयों एवं उनसे संबंधित सहवर्ती पदों/सेवाओं के सृजन के संबंध में आदेश जारी किया है। यह निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही संबंधित न्यायिक कार्यवाही के अनुपालन के क्रम में लिया गया है।
शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, प्रदेश में कुल 9149 न्यायालयों के गठन की प्रक्रिया के प्रथम चरण में 900 न्यायालयों एवं सहवर्ती पदों के सृजन से संबंधित कार्यवाही की जा रही है। आदेश में विभिन्न जनपदों के लिए अलग-अलग श्रेणी के न्यायालयों एवं सहवर्ती पदों का विवरण संलग्नक के माध्यम से दिया गया है।
900 नए न्यायालयों के लिए महत्वपूर्ण शर्त
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि इन 900 न्यायालयों एवं सहवर्ती पदों/सेवाओं का सृजन इस शर्त के अधीन होगा कि वर्तमान में स्वीकृत पदों के सापेक्ष रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तथा नवसृजित पदों के सापेक्ष आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने के आधार पर ही इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
साथ ही, शेष चरणों में प्रस्तावित न्यायालयों एवं पदों के सृजन पर उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाएगा।
28 फरवरी 2027 तक का प्रावधान
आदेश में कहा गया है कि संलग्नक-2 में दिए गए विवरण के अनुसार प्रदेश के जनपदों के लिए विभिन्न श्रेणी के कुल 900 न्यायालयों एवं सहवर्ती पदों/सेवाओं को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 28 फरवरी 2027 तक के लिए सृजित किए जाने की सहमति प्रदान की गई है, बशर्ते पूर्व सूचना से पहले ही इन्हें समाप्त न कर दिया गया हो।
आउटसोर्सिंग से संबंधित भी निर्देश
900 न्यायालयों के लिए अर्दली, एचएन/दफ्तरी आदि के मानव संसाधन के समतुल्य मानव शक्ति की खरीद अथवा जॉब आउटसोर्सिंग से लिए जाने वाले पदों का सृजन नहीं किया जाएगा। इसके लिए संबंधित शासनादेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में भारत सरकार द्वारा विकसित जेम पोर्टल (Government e-Marketplace) की व्यवस्था लागू किए जाने तथा आउटसोर्सिंग से संबंधित शासनादेशों का पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
खर्च किस बजट मद से होगा?
नए न्यायालयों और सहवर्ती पदों के संबंध में होने वाला व्यय वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक के अनुदान संख्या 42 के अंतर्गत निर्धारित लेखा शीर्षक “2014-न्याय प्रशासन-105-सिविल और सेशन न्यायालय-03-जिला तथा सेशन न्यायाधीश” के तहत विभिन्न संगत मानक मदों के नामे डाला जाएगा।
वित्त विभाग की सहमति के बाद जारी हुआ आदेश
शासनादेश में यह भी उल्लेख है कि आदेश वित्त विभाग के अशासकीय संख्या E-12-252-X-2026-27, दिनांक 17 सितंबर 2026 में प्राप्त सहमति के आधार पर जारी किया जा रहा है।


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