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‘सिर्फ एक जैसा काम करने से समान वेतन का दावा नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के मामले में सुनाया अहम फैसला

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल यह तथ्य कि दो कर्मचारी एक जैसा काम कर रहे हैं या उनकी जिम्मेदारियां समान हैं, अपने-आप समान वेतन का अधिकार पैदा नहीं करता। वेतन समानता के लिए भर्ती का स्रोत, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, नियुक्ति की प्रक्रिया, जिम्मेदारी और सेवा नियमों समेत अन्य पहलुओं में समानता देखी जाएगी।

समान काम के लिए समान वेतन सुप्रीम कोर्ट

यह फैसला G.P. Sangeetha एवं अन्य बनाम State of Kerala एवं अन्य तथा इससे जुड़े मामले में 8 सितंबर 2026 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अपीलें खारिज कर दीं।

क्या था पूरा मामला?

मामला केरल के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्त Higher Secondary School Teachers (Junior) से जुड़ा था। एक वर्ग के शिक्षक सीधे भर्ती के माध्यम से नियुक्त हुए थे, जबकि दूसरे शिक्षक ट्रांसफर या प्रमोशन के जरिए इस कैडर में आए थे।

सीधे भर्ती हुए शिक्षकों का कहना था कि दोनों वर्ग के शिक्षक समान काम और जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए उन्हें भी वही पे-स्केल मिलना चाहिए जो प्रमोशन या ट्रांसफर से आए शिक्षकों को मिल रहा था।

केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने हालांकि दोनों वर्गों को समान नहीं माना था। अदालत ने ध्यान दिया कि प्रमोशन के जरिए आए शिक्षक पहले से लंबे समय तक स्थायी शिक्षक के रूप में सेवा दे चुके थे और उसी अनुभव तथा पूर्व सेवा की स्थिति के आधार पर उन्हें उच्चतर वेतन लाभ दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘समान काम के लिए समान वेतन’ का सिद्धांत हर मामले में यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। केवल कार्य की समानता दिखाना पर्याप्त नहीं है। समान वेतन का दावा करने वाले कर्मचारी को प्रासंगिक सेवा शर्तों में वास्तविक और व्यापक समानता स्थापित करनी होगी।

अदालत ने अपने पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वेतन समानता तय करते समय भर्ती का स्रोत, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, नियुक्ति का तरीका तथा जिम्मेदारी और जवाबदेही जैसे पहलुओं पर विचार किया जाना जरूरी है।

अनुभव को माना महत्वपूर्ण आधार

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन या ट्रांसफर से आए शिक्षकों के पूर्व शिक्षकीय अनुभव को एक वैध और समझने योग्य आधार माना। अदालत के अनुसार, इन शिक्षकों की पहले की लंबी सेवा उन्हें सीधे भर्ती होकर आए नए शिक्षकों से अलग करती है। इसी अंतर के आधार पर अलग वेतन-स्केल को उचित माना गया।

अदालत ने यह भी माना कि संविधान का अनुच्छेद 14 उचित वर्गीकरण की अनुमति देता है। सेवा मामलों में अनुभव और योग्यता प्रशासनिक दक्षता से संबंधित उचित वर्गीकरण का आधार हो सकते हैं।

‘समान काम’ के साथ ये बातें भी देखी जाएंगी

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने समान वेतन के दावे के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया। इनमें मुख्य रूप से—

  • भर्ती का स्रोत
  • शैक्षणिक योग्यता
  • पूर्व सेवा और अनुभव
  • नियुक्ति का तरीका
  • काम की प्रकृति
  • जिम्मेदारी और जवाबदेही
  • लागू सेवा नियम

शामिल हैं। अदालत ने कहा कि यदि इन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं में पूर्ण समानता नहीं है, तो केवल कार्य की समानता के आधार पर वेतन समानता नहीं मांगी जा सकती।

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर भी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट के सामने State of West Bengal v. Anirban Ghosh मामले के कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उस फैसले में इस विषय पर पहले दिए गए बाध्यकारी सुप्रीम कोर्ट के सभी प्रासंगिक फैसलों पर विचार नहीं किया गया था। इसलिए, जहां तक वह फैसला बाध्यकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से असंगत है, उसे per incuriam माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील क्यों खारिज की?

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि प्रमोशन या ट्रांसफर से आए शिक्षकों और सीधे भर्ती हुए शिक्षकों के बीच अनुभव के स्तर पर समानता नहीं थी। अदालत ने इस अंतर को वेतन-स्केल में अंतर का वैध आधार माना।

इसी वजह से कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया और संबंधित अपीलों को खारिज कर दिया।

फैसले का सार

इस फैसले का मूल बिंदु यह है कि समान काम करना अपने-आप समान वेतन का निर्णायक आधार नहीं है। वेतन समानता के लिए कर्मचारियों के बीच भर्ती, योग्यता, अनुभव, सेवा-शर्तों और जिम्मेदारियों सहित संबंधित कारकों में वास्तविक समानता देखी जाएगी। इस मामले में पूर्व शिक्षकीय अनुभव को वेतन में अंतर के लिए वैध आधार माना गया।

मामला: G.P. Sangeetha & Ors. Etc. v. State of Kerala & Ors.
फैसले की तारीख: 8 सितंबर 2026
पीठ: जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू
मुख्य मुद्दा: सीधे भर्ती और प्रमोशन/ट्रांसफर से नियुक्त शिक्षकों के बीच वेतन समानता
नतीजा: अपीलें खारिज; अनुभव के आधार पर अलग वेतन-स्केल को इस मामले में उचित माना गया।


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