लखनऊ। प्रदेश में कर्मचारियों की ग्रेच्युटी को लेकर नियोक्ताओं की जवाबदेही तय की गई है। उत्तर प्रदेश सामाजिक सुरक्षा संहिता नियमावली-2026 में ग्रेच्युटी के भुगतान से लेकर बकाया राशि की वसूली तक की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। इसके तहत सक्षम या अपीलीय प्राधिकारी द्वारा ग्रेच्युटी की राशि निर्धारित किए जाने और नियोक्ता को नोटिस मिलने के बाद निर्धारित अवधि में कर्मचारी को भुगतान करना होगा।
नियमावली के अनुसार, नियोक्ता को नोटिस मिलने के 30 दिन के भीतर ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान करना होगा। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो कर्मचारी बकाया ग्रेच्युटी की वसूली के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष वसूली प्रमाणपत्र जारी करने का आवेदन कर सकेगा।
वसूली प्रमाणपत्र जारी होने के बाद भी यदि नियोक्ता बकाया राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसकी चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा सकती है। इसके बाद कुर्क की गई संपत्ति को बेचकर ग्रेच्युटी की बकाया रकम की वसूली की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को उनकी वैधानिक ग्रेच्युटी दिलाना और भुगतान में लापरवाही करने वाले नियोक्ताओं की जवाबदेही तय करना है।
नियमावली में ग्रेच्युटी के नामांकन को लेकर भी व्यवस्था की गई है। कर्मचारी अपने नामांकित व्यक्ति अथवा कानूनी वारिस का नाम और उसके हिस्से का उल्लेख कर सकेगा। नियोक्ता को नामांकन का सत्यापन कर उसे अपने रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा और कर्मचारी को उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध करानी होगी। परिवार की स्थिति में बदलाव होने पर कर्मचारी संशोधित या नया नामांकन भी कर सकेगा।
यदि कर्मचारी को न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी से राहत मिलने के बावजूद ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाता है, तो मूल बकाया राशि के साथ नियमानुसार ब्याज और वसूली लागत की मांग भी की जा सकती है। इससे कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान समय पर कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था मिलेगी।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म