लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। जनगणना निदेशालय की ओर से जिलों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दूसरे चरण में व्यक्तियों की गणना के लिए नए जनगणना ब्लॉक बनाए जाएंगे। कोशिश की जा रही है कि प्रत्येक प्रगणक पर औसतन 800 से 850 लोगों की आबादी का ही भार रहे, ताकि घर-घर जाकर जानकारी जुटाने में परेशानी न हो और आंकड़े सही तरीके से दर्ज किए जा सकें।
पहले चरण में हाउस लिस्टिंग सर्वे के दौरान हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाए गए थे। अब इन्हीं ब्लॉकों को जरूरत के अनुसार जनगणना ब्लॉक में बदला जाएगा। यदि किसी हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में करीब 400 घर और 1100 की आबादी है, तो उसे दो जनगणना ब्लॉकों में बांटा जा सकता है। इस तरह एक प्रगणक पर अधिक आबादी का भार नहीं पड़ेगा।
हाउस लिस्टिंग ब्लॉक से जनगणना ब्लॉकों की संख्या निर्धारित होने के बाद इसे फ्रीज कर दिया जाएगा। इसके बाद जनगणना ब्लॉकों की संख्या बढ़ाई तो जा सकेगी, लेकिन निर्धारित संख्या को कम नहीं किया जा सकेगा। इसलिए ब्लॉक तैयार करने की प्रक्रिया में आबादी और क्षेत्र का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
जनगणना के दूसरे चरण में लोगों को स्वगणना का विकल्प भी दिया जाएगा। प्रदेश में 16 नवंबर से 30 नवंबर तक लोग स्वगणना पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक प्रगणक घर-घर जाकर जनगणना की जानकारी एकत्र करेंगे।
शहरी क्षेत्रों, कार्यालयों और हाउसिंग सोसायटियों में अधिक से अधिक लोगों को स्वगणना के लिए प्रेरित करने की योजना है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्वगणना पूरी करने वाले परिवारों के घर के पते पर स्वगणना आईडी भी लगाई जाएगी, ताकि प्रगणक के पहुंचने पर प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सके।
जनगणना में किसी भी परिवार या व्यक्ति की गिनती छूट न जाए, इसके लिए आबादी को अलग-अलग प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बांटकर काम किया जाएगा। सामान्य परिवारों के साथ स्लम, घनी बस्तियों और किराएदारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा जेल, वृद्धाश्रम, छात्रावास और पंजीकृत पीजी जैसे संस्थागत क्षेत्रों को भी कवर किया जाएगा।
बेघर लोगों की गणना पर भी विशेष फोकस रहेगा। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, बाजार, निर्माण स्थल, लेबर अड्डे और पूजा स्थलों जैसे स्थानों पर रहने वाले बेघर परिवारों को भी जनगणना में शामिल किया जाएगा। इनकी गणना फील्ड वर्क के अंतिम दिन शाम के बाद की जाएगी। जारी कार्यक्रम के अनुसार 4 जनवरी को शाम के बाद बेघर परिवारों की गणना की जाएगी।
इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य जनगणना के दौरान प्रदेश की आबादी का अधिकतम और सटीक कवरेज सुनिश्चित करना है, ताकि कोई परिवार, व्यक्ति या क्षेत्र गणना से बाहर न रह जाए।


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