लखनऊ: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती इस बार (2 अक्टूबर 2026) उत्तर प्रदेश में बेहद खास और व्यापक अंदाज में मनाई जाएगी। प्रदेश शासन ने इस राष्ट्रीय पर्व को भव्य रूप देने और इसके संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, इस दिन पूरे राज्य में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को कृतज्ञतापूर्वक नमन किया जाएगा तथा गांधीवादी आदर्शों का प्रसार किया जाएगा।
सरकारी भवनों पर फहराएगा तिरंगा और गूंजेंगे विचार
समारोह की शुरुआत प्रदेश के सभी राजकीय भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ होगी। इसके पश्चात, सुबह 9:00 बजे सभी कार्यालयों, विद्यालयों और अन्य संस्थानों में किसी वरिष्ठ अधिकारी या प्रधानाचार्य द्वारा महात्मा गांधी के चित्र का अनावरण एवं माल्यार्पण किया जाएगा। इस दौरान उनके जीवन-संघर्ष, देशसेवा और 'अन्त्योदय' जैसी अवधारणाओं पर विशेष प्रकाश डाला जाएगा।
युवा पीढ़ी में समानता और समरसता की अलख
शासनादेश में स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों के बीच गांधीवादी जीवन-दृष्टि पर आधारित वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और गोष्ठियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता, मानवाधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है।
महिला सशक्तिकरण और ग्राम स्वराज पर रहेगा विशेष फोकस
प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी अभियान चलाया जाएगा, जिसमें बालिका शिक्षा, दहेज प्रथा की समाप्ति और महिलाओं को आर्थिक-सामाजिक रूप से आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही, महात्मा गांधी के 'ग्राम स्वराज' के सपने को साकार करने हेतु गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के प्रयासों से आम जनता को अवगत कराया जाएगा।
सादगी, नैतिकता और भाईचारे का संदेश
इस अवसर पर जनसामान्य को 'सादा जीवन-उच्च विचार', मितव्ययिता, नैतिकता, सर्वधर्म समभाव, सत्य और अहिंसा जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी जाएगी। साथ ही, पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती, ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी तथा प्रदेश सरकार की विभिन्न विकासपरक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार संस्थान अपनी सुविधानुसार कार्यक्रमों में उचित परिवर्तन या नए आयाम भी जोड़ सकेंगे।


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