लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों को डिजिटल शिक्षण और ऑनलाइन उपस्थिति के लिए उपलब्ध कराए गए टैबलेट अब विभाग की कड़ी निगरानी में होंगे। शासन स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं कि शिक्षकों को दिए गए टैबलेट का डिजिटल ऑडिट कराया जाएगा। यदि जांच में यह पाया गया कि टैबलेट का उपयोग शैक्षणिक कार्यों के बजाय निजी मनोरंजन, सोशल मीडिया या अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
टैबलेट के उपयोग का पूरा डेटा खंगालेगा विभाग
शिक्षा विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम टैबलेट के उपयोग से संबंधित डिजिटल डेटा की जांच करेगी। इस ऑडिट के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि शिक्षक ने पूरे दिन टैबलेट का कितना उपयोग किया, किन शैक्षणिक ऐप्स पर कार्य किया और कितना समय अन्य गतिविधियों में व्यतीत किया।
विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन से उपलब्ध कराए गए टैबलेट का उपयोग केवल बच्चों की पढ़ाई, डिजिटल कंटेंट, ऑनलाइन उपस्थिति और विभागीय कार्यों के लिए ही हो।
जिले में 4172 शिक्षकों को मिले हैं टैबलेट
जानकारी के अनुसार जिले में 4172 शिक्षकों को सिम कार्ड और इंटरनेट डेटा के साथ टैबलेट वितरित किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य कक्षाओं में स्मार्ट शिक्षण को बढ़ावा देना, बच्चों को डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराना तथा रियल-टाइम में मिड-डे मील एवं छात्र उपस्थिति दर्ज करना है।
हालांकि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शिक्षक विद्यालय समय में टैबलेट पर यूट्यूब, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य निजी वेबसाइटों का उपयोग कर रहे हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर अब डिजिटल ऑडिट की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान होगी भौतिक जांच
महानिदेशक स्कूल शिक्षा और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर से खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि विद्यालय निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के टैबलेट की भौतिक जांच भी करें। टैबलेट की लॉग फाइल, ऐप उपयोग और स्क्रीन टाइम की समय-समय पर मॉनिटरिंग की जाएगी।
यदि किसी शिक्षक के टैबलेट में विभागीय गाइडलाइन के विपरीत गतिविधियां, अनधिकृत ऐप डाउनलोड, विभागीय डेटा से छेड़छाड़ या अन्य तकनीकी गड़बड़ियां पाई जाती हैं, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने की पहल
शिक्षा विभाग का मानना है कि डिजिटल संसाधनों का सही उपयोग होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और कक्षाओं में तकनीक आधारित शिक्षण को मजबूती मिलेगी। इसलिए अब टैबलेट के उपयोग पर नियमित निगरानी रखी जाएगी, ताकि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।
मुख्य बातें
- शिक्षकों के टैबलेट का होगा डिजिटल ऑडिट।
- उपयोग का पूरा डेटा और स्क्रीन टाइम जांचा जाएगा।
- निरीक्षण के दौरान टैबलेट की भौतिक जांच भी होगी।
- गैर-शैक्षणिक उपयोग मिलने पर प्रतिकूल प्रविष्टि और विभागीय कार्रवाई।
- टैबलेट का उपयोग केवल पढ़ाई, ऑनलाइन उपस्थिति और विभागीय कार्यों के लिए करने के निर्देश।



