नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में TET (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर पूछे गए प्रश्न पर केंद्र सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। सांसद ई. तुकाराम द्वारा लगभग 25 लाख शिक्षकों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सवाल उठाए जाने के बाद केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लिखित उत्तर दिया।
मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि TET अनिवार्यता का विषय समवर्ती सूची (Concurrent List) से जुड़ा है, इसलिए इसमें राज्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर राज्यों के लिए किसी नई गाइडलाइन या विशेष निर्देश की घोषणा नहीं की है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने उत्तर में यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 के आदेश में TET अनिवार्यता की समय-सीमा वर्ष 2028 तक बढ़ा दी है। सरकार ने संकेत दिया कि फिलहाल इस न्यायिक आदेश में बदलाव के लिए कोई विधायी पहल या संशोधन विधेयक लाने की योजना नहीं है।
मंत्री के जवाब से यह भी स्पष्ट हुआ कि केंद्र सरकार फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध कोई संशोधन विधेयक लाने पर विचार नहीं कर रही है। यानी TET अनिवार्यता को लेकर फिलहाल न्यायालय का आदेश ही प्रभावी रहेगा।
केंद्र सरकार के इस जवाब के बाद TET अनिवार्यता से जुड़े लाखों शिक्षकों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। कई शिक्षक संगठन लंबे समय से इस विषय पर स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। हालांकि फिलहाल केंद्र सरकार ने इस मामले में कोई नई नीति या राहत देने के संकेत नहीं दिए हैं।
निष्कर्ष:
संसद में दिए गए जवाब से स्पष्ट है कि TET अनिवार्यता का मुद्दा फिलहाल राज्यों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में ही रहेगा। वर्ष 2028 तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा और केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल किसी नए विधायी हस्तक्षेप की संभावना नहीं दिखाई दे रही है।



