उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन (Redeployment) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि समायोजन प्रक्रिया पर पूर्ण रूप से रोक नहीं लगाई गई है। बल्कि प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
डेटा संबंधी त्रुटियों पर मिलेगा अंतिम अवसर
हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी शिक्षक को गलत आंकड़ों या अभिलेखों के आधार पर सरप्लस घोषित किया गया है, तो उसे अपनी आपत्ति दर्ज कराने का अंतिम अवसर दिया जाएगा। यह अवसर केवल डेटा या रिकॉर्ड से जुड़ी त्रुटियों के लिए होगा।
वरिष्ठ शिक्षक के हितों की होगी सुरक्षा
यदि किसी विद्यालय में वरिष्ठ (Senior-most) शिक्षक को सरप्लस घोषित किया गया है, जबकि उससे जूनियर शिक्षक पिछले पाँच वर्षों के भीतर उसी विद्यालय में नियुक्त किए गए हैं, तो वरिष्ठ शिक्षक इस आधार पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। यह व्यवस्था पारस्परिक (Mutual), चिकित्सकीय (Medical) स्थानांतरण तथा दिव्यांग शिक्षकों पर लागू नहीं होगी।
"First Come, First Go" सिद्धांत रहेगा लागू
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जहाँ पाँच वर्ष से अधिक समय से कार्यरत शिक्षकों का मामला होगा, वहाँ 22 मई 2026 के शासनादेश के अनुसार "First Come, First Go" का सिद्धांत लागू रहेगा।
27 जुलाई तक ऑफलाइन आपत्ति दर्ज करें
सरप्लस घोषित शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक अपने संबंधित जनपद के बीएसए कार्यालय में ऑफलाइन आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। प्राप्ति रसीद लेना अनिवार्य होगा। साथ ही आपत्ति की एक प्रति एक सप्ताह के भीतर स्पीड पोस्ट से सचिव, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज को भेजनी होगी। ऐसा न करने पर आपत्ति मान्य नहीं मानी जाएगी।
आपत्तियों का निस्तारण कैसे होगा?
बीएसए सभी प्राप्त आपत्तियों को 1 अगस्त 2026 तक सचिव को भेजेंगे। इसके बाद गठित समितियाँ आपत्तियों का परीक्षण कर उनका निस्तारण करेंगी। शिक्षक व्यक्तिगत रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी अपना पक्ष रख सकेंगे।
पोर्टल पर अपलोड होगी अंतिम रिपोर्ट
सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद विद्यालयवार, ब्लॉकवार और जनपदवार अंतिम रिपोर्ट विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। न्यायालय ने अपेक्षा व्यक्त की है कि यह कार्य 10 अगस्त 2026 से प्रारंभ हो जाएगा।
किन मामलों में सचिव अंतिम निर्णय नहीं देंगे?
यदि विवाद पिछले पाँच वर्षों में हुई नियुक्तियों या तैनातियों के कारण उत्पन्न सरप्लस से संबंधित है, तो ऐसे मामलों में सचिव अंतिम निर्णय नहीं देंगे। ऐसे प्रकरण हाईकोर्ट के विचाराधीन बने रहेंगे।
अगली सुनवाई 5 अगस्त को
मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। उस दिन न्यायालय समायोजन प्रक्रिया और आपत्तियों के निस्तारण की प्रगति की समीक्षा करेगा।
हाईकोर्ट के आदेश से स्पष्ट है कि सरप्लस शिक्षकों का समायोजन जारी रहेगा, लेकिन पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत तरीके से पूरी की जाएगी। इसलिए जिन शिक्षकों को सरप्लस घोषित किया गया है, वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्ति अवश्य दर्ज करें और सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करें।


