लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से स्थापित स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी (ICT) लैब के उपयोग को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा कार्यालय द्वारा सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि जिन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास एवं ICT लैब उपलब्ध हैं, वहां उनका नियमित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कराया जाए।
विभाग द्वारा 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक की ऑनलाइन उपयोग रिपोर्ट की समीक्षा की गई। इस समीक्षा में कई जिलों में स्मार्ट क्लास और ICT लैब का उपयोग अपेक्षा से काफी कम पाया गया। बड़ी संख्या में ऐसे उपकरण भी मिले जो लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए विभाग ने सभी जिलों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
पत्र में कहा गया है कि समग्र शिक्षा एवं पीएम श्री योजना के अंतर्गत प्रदेश के उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बड़ी संख्या में स्मार्ट क्लास एवं ICT लैब स्थापित की गई हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि इन संसाधनों का नियमित उपयोग नहीं होगा तो सरकार द्वारा किए गए निवेश का अपेक्षित लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाएगा।
शिक्षा विभाग ने जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे विद्यालयों में स्मार्ट क्लास एवं ICT लैब की नियमित मॉनिटरिंग करें। जहां उपकरण निष्क्रिय हैं, उन्हें तत्काल चालू कराया जाए तथा शिक्षकों को कक्षा शिक्षण में डिजिटल सामग्री का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रतिदिन उपयोग हो।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी समीक्षा बैठकों में प्रत्येक जिले की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। जिन जिलों में उपयोग की स्थिति संतोषजनक नहीं मिलेगी, वहां संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय की जा सकती है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्मार्ट क्लास और ICT लैब के नियमित उपयोग से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता में सुधार होगा, कक्षा शिक्षण अधिक रोचक और प्रभावी बनेगा तथा डिजिटल शिक्षा को नई गति मिलेगी। इसलिए सभी विद्यालयों से अपेक्षा की गई है कि वे विभागीय निर्देशों का पालन करते हुए तकनीक आधारित शिक्षण को अपनी दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा बनाएं।
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी जिलों, विद्यालयों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि उपलब्ध स्मार्ट क्लास एवं ICT लैब का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा का पूरा लाभ मिल सके।
मुख्य बातें (Highlights)
- समग्र शिक्षा एवं पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्थापित स्मार्ट क्लास एवं ICT लैब के उपयोग को लेकर नया आदेश जारी।
- महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक ने सभी BSA को निर्देश भेजे।
- 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक की उपयोग रिपोर्ट की समीक्षा में कई जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिला।
- कई विद्यालयों में स्मार्ट क्लास एवं ICT डिवाइस लंबे समय से निष्क्रिय (Inactive) पाए गए।
- विद्यालयों में डिजिटल शिक्षण को नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- स्मार्ट क्लास और ICT लैब का कक्षा शिक्षण में दैनिक उपयोग सुनिश्चित करने के आदेश।
- निष्क्रिय उपकरणों को शीघ्र सक्रिय कराने और तकनीकी समस्याओं का समाधान कराने के निर्देश।
- जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और उपयोग की समीक्षा की जाएगी।
- आगामी विभागीय समीक्षा बैठकों में जिलावार प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा।
- उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ नियमित रूप से मिल सके।






