यूपी-टीईटी परीक्षा को लेकर परिषदीय शिक्षकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। चार साल के लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आगामी 2 से 4 जुलाई तक यह परीक्षा आयोजित की जानी प्रस्तावित है। इस बार परीक्षा के लिए कुल 15,99,638 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, जिनमें से 1,85,791 केवल परिषदीय विद्यालयों के सेवारत शिक्षक हैं। इनमें से कई शिक्षकों ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों की परीक्षाओं के लिए फॉर्म भरा है।
शिक्षकों के लिए इस परीक्षा में शामिल होना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने से पहले के सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य है। प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में पदोन्नति पाने के लिए भी उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक किया गया है। इसके खिलाफ शिक्षकों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दो बार याचिकाएं भी दायर की गईं, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया।
न्यायालय के कड़े रुख के बीच सेवा अवधि के आधार पर कुछ शर्तें तय की गई हैं। जिन शिक्षकों की पांच साल से कम की सेवा बाकी है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम करने की छूट दी गई है, लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, जिनके पास पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें आगामी तीन साल के भीतर हर हाल में टीईटी पास करना होगा, अन्यथा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश आने के बाद उत्तर प्रदेश के हजारों शिक्षकों ने यूपी-टीईटी का इंतजार किए बिना केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) में भाग लिया और उसे पास भी कर लिया। चूंकि उत्तर प्रदेश में सीटीईटी को भी पूरी मान्यता प्राप्त है, इसलिए इन शिक्षकों को अब बड़ी राहत मिल चुकी है।
दूसरी ओर, प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 2300 से अधिक विषय विशेषज्ञों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के आधिकारिक आदेश का बेसब्री से इंतजार है। वर्ष 2002 में नियुक्त हुए इन 2323 शिक्षकों को राज्य सरकार ने मार्च में राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर ओपीएस का विकल्प चुनने की मंजूरी दी थी। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों से आवेदन प्राप्त कर पुरानी पेंशन योजना के लिए अंतिम तिथि बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था, लेकिन अब तक समयसीमा बढ़ाने संबंधी कोई भी आधिकारिक आदेश जारी नहीं हो सका है जिससे शिक्षक असमंजस में हैं।


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