लखनऊ, 15 जून 2026।
उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भीषण गर्मी के बाद हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश के उपरान्त राज्य के सभी परिषदीय एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों को दिनांक 16 जून 2026 से पूर्ण रूप से पुनः संचालित करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने प्रदेश के समस्त जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) को इस संबंध में सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश प्रेषित किए हैं।
शासनादेश के अनुसार विद्यालय संचालन समय
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार परिषदीय एवं मान्यता प्राप्त प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन निम्नानुसार किया जाएगा—
1 अप्रैल से 30 सितम्बर तक
- विद्यालय समय: प्रातः 8:00 बजे से अपराह्न 2:00 बजे तक
- प्रार्थना सभा/योगाभ्यास: प्रातः 8:00 बजे से 8:15 बजे तक
- मध्याह्न भोजन (MDM): प्रातः 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
1 अक्टूबर से 31 मार्च तक
- विद्यालय समय: प्रातः 9:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक
- प्रार्थना सभा/योगाभ्यास: प्रातः 9:00 बजे से 9:15 बजे तक
- मध्याह्न भोजन (MDM): अपराह्न 12:00 बजे से 12:30 बजे तक
शासनादेश में सभी विद्यालयों को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आज जारी आदेश में निम्नलिखित दिशा निर्देश जारी किए गए हैं जो इस प्रकार से हैं:
1. विद्यालयों में साफ-सफाई और सघन जांच अभियान
लंबे समय तक बंद रहने के कारण विद्यालयों में धूल-धूसरित माहौल और कीट-पतंगों की संभावना को देखते हुए शिक्षा निदेशक ने सख्त निर्देश दिए हैं कि विद्यालय खुलने से पूर्व ही संपूर्ण परिसर की गहन सफाई सुनिश्चित की जाए:
- प्रत्येक कक्षा कक्ष की विशेष रूप से पोछा व झाड़ू लगाकर सफाई कराई जाएगी।
- कक्षाओं के सभी कोनों, बेंच-फर्नीचर, और विशेष रूप से अलमारियों के नीचे के हिस्सों की बारीकी से सफाई कर जांच की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार के हानिकारक जीव या गंदगी का नामोनिशान न रहे।
2. पहले दिन बच्चों का होगा पारंपरिक और भव्य स्वागत
बच्चों में स्कूल के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और उत्साह की भावना जाग्रत करने के लिए इस बार एक अनूठी और प्रेरक पहल की जा रही है। आदेश के अनुसार, ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय के प्रथम दिन (16 जून) को एक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा:
- उत्सवी स्वागत रणनीति: विद्यालय आगमन पर सभी छात्र-छात्राओं का शिक्षकों द्वारा रोली एवं तिलक (टीका) लगाकर आत्मीय स्वागत किया जाएगा।
- विद्यालय परिसर में ऐसा आनंदमयी वातावरण तैयार किया जाएगा जिससे बच्चे स्वयं को गौरवान्वित और आनंदित महसूस कर सकें तथा विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।
3. जर्जर भवनों पर पूर्ण प्रतिबंध: सुरक्षा सर्वोपरि
छात्रों की सुरक्षा से समझौता न करने की नीति के तहत इस आदेश में बेहद कड़ा रुख अपनाया गया है। जर्जर एवं unsafe स्कूल भवनों को लेकर स्पष्ट चेतावनी जारी की गई है:
- 🚨 महत्वपूर्ण सुरक्षा चेतावनी: किसी भी परिस्थिति में जर्जर या खस्ताहाल भवनों के भीतर पठन-पाठन की गतिविधियां संचालित नहीं की जाएंगी।
- ऐसे असुरक्षित घोषित हो चुके भवनों पर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में "निष्प्रयोज्य भवन" अंकित करना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि कोई भी बच्चा भूलवश भी उसके समीप न जाए।
4. बुनियादी ढांचा, मध्याह्न भोजन (MDM) एवं विशेष मेन्यू
विद्यालयों के सफल संचालन के लिए मूलभूत सुविधाओं जैसे पेयजल, क्रियाशील शौचालय और बिजली की सुचारू आपूर्ति को दुरुस्त करने के आदेश हैं। मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) को लेकर निम्नलिखित गाइडलाइंस दी गई हैं:
- रसोईघर (किचन) की पूरी तरह से साफ-सफाई सुनिश्चित कर हाइजीन का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
- प्रथम दिन निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार ही ताजा व पौष्टिक भोजन तैयार किया जाएगा।
- विशेष उपहार: पहले दिन बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु निर्धारित मेन्यू के अतिरिक्त यथासंभव पौष्टिक मीठा खाद्य पदार्थ/भोज्य पदार्थ भी विशेष रूप से वितरित किया जाएगा।
5. समय-सारणी का अनुपालन एवं पाठ्यपुस्तकों का वितरण
नये शैक्षणिक सत्र की सुचारू शुरुआत के लिए शैक्षणिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य होगा। शिक्षा निदेशक ने साफ किया है कि बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के पत्रांक बे०शि०प० / 19684-89 / 2025-26 दिनांक 31.12.2025 द्वारा जो समय-सारणी पहले से तय की गई है, उसी के अनुरूप ही कक्षाओं का संचालन और पठन-पाठन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को उनकी आवश्यक पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो चुकी हों।
6. प्रमुख उत्तरदायित्व और प्रबंधन की रूपरेखा
आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षा निदेशक ने जवाबदेही और अधिकारों की रूपरेखा भी स्पष्ट की है:
- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA): संपूर्ण जनपद के विद्यालयों में इन व्यवस्थाओं का प्रभावी, जमीनी एवं कड़ा अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
- विद्यालय प्रबंध समिति (SMC): उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के मामलों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार आवश्यक निर्णय लेने हेतु पूर्ण रूप से अधिकृत होंगी।
- अभिभावक संपर्क: शिक्षकों द्वारा अभिभावकों को स्कूल खुलने तथा बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में जानकारी देकर जागरूक किया जाएगा।





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