लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने प्रदेशभर में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं की कमी को दूर करने के लिए कमर कस ली है। विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के 7068 और सहायिका के 21540 संविदा पदों पर भर्ती प्रक्रिया को गति प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशक हर्षिता माथुर ने प्रदेश के सभी जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों (DPO) को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इसके अतिरिक्त, विभाग ने सभी जिलों से उन रिक्त पदों का भी विस्तृत ब्योरा तलब किया है जो बीते अप्रैल माह में कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं के 62 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने के कारण खाली हुए हैं। इन पदों को भी मुख्य भर्ती प्रक्रिया में शामिल कर जल्द से जल्द भरने की तैयारी है।
पारदर्शिता के लिए अपनाई जाएगी यह व्यवस्था
भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए विभाग ने व्यापक प्रबंध किए हैं। रिक्त पदों की सूची केवल ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उपलब्ध होगी:
- सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा: चयन संबंधी सूचनाएं कलक्ट्रेट, विकास भवन, तहसील और विकास खंड कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से चस्पा की जाएंगी।
- विज्ञापन और पोर्टल: इन पदों के लिए दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किए जाएंगे। साथ ही, विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर भी सभी जानकारी समय-समय पर अपडेट की जाएगी, ताकि इच्छुक उम्मीदवार आसानी से आवेदन कर सकें।
उन 6 जिलों पर विशेष ध्यान, जहां दो साल से नहीं हुई भर्ती
विभाग ने इस बात पर गंभीर रुख अपनाया है कि राज्य के कुछ जिलों में भर्ती प्रक्रिया काफी समय से लंबित है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 से गाजीपुर, हाथरस, कन्नौज, मैनपुरी, पीलीभीत और वाराणसी में चयन प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी है। विभाग ने इन छह जिलों में पिछले दो वर्षों से भर्ती न होने पर नाराजगी व्यक्त की है और अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर इन जिलों में रिक्तियों को भरने के निर्देश दिए हैं।
इस भर्ती के माध्यम से प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन और बच्चों व गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली पुष्टाहार सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।


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