नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बेहद अहम और बड़ी खबर है। लगातार उठ रहे पेपर लीक विवादों और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अगले साल से नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा को पारंपरिक पेन-पेपर (ओएमआर शीट) की बजाय पूरी तरह से 'कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट' (CBT) मोड में आयोजित करेगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच बनी सहमति
नीट-यूजी परीक्षा मूल रूप से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है, जबकि इसका आयोजन शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एजेंसी NTA करती है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों से परीक्षा को ऑनलाइन करने पर विचार-विमर्श चल रहा था। हालिया विवादों को देखते हुए अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी अपनी हिचकिचाहट छोड़ते हुए अगले साल से इसे सीबीटी (CBT) मोड में कराने पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।
पेपर लीक कांड के बाद लिया गया फैसला
इस बड़े बदलाव की रूपरेखा हाल ही में हुए नीट पेपर लीक विवाद के बाद तय की गई थी। गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा में भारी गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोप लगे थे। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए इसे सीबीटी मोड में कराने का ऐलान किया था। विवादित परीक्षा को रद्द करने के बाद 21 जून को दोबारा सफलतापूर्वक नीट-यूजी परीक्षा आयोजित की गई। अब NTA ने अगले साल के लिए नई प्रणाली पर काम करना शुरू कर दिया है।
क्या एक दिन में हो पाएगी परीक्षा? यह है सबसे बड़ी चुनौती
कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट को लागू करने में NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स की है। नीट-यूजी देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर साल 22 से 24 लाख छात्र शामिल होते हैं। इतने बड़े पैमाने पर कंप्यूटर लैब्स की व्यवस्था करना आसान नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि परीक्षा पहले की तरह एक ही दिन में आयोजित होगी, या फिर इसे इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (JEE Main) और CUET की तर्ज पर कई दिनों और अलग-अलग शिफ्टों में बांटा जाएगा।
राज्यों और छात्रों को किया जाएगा तैयार
चूंकि यह परीक्षा के पैटर्न और माध्यम में एक बहुत बड़ा बदलाव है, इसलिए छात्रों को इसके लिए पहले से तैयार करना जरूरी है। NTA जल्द ही इस मुद्दे पर राज्य सरकारों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी। इसके अलावा, आम जनता, अभिभावकों और शिक्षाविदों से भी रायशुमारी की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा देने में कोई असुविधा न हो।
राधाकृष्णन कमेटी ने पहले ही दी थी सिफारिश
परीक्षाओं में सुधार के लिए गठित की गई 'राधाकृष्णन कमेटी' ने पहले ही यह सुझाव दिया था कि नीट-यूजी जैसी संवेदनशील परीक्षा को पेपर लीक से बचाने के लिए सीबीटी मोड में कराया जाना चाहिए। हालिया विवाद के बाद सरकार पर यह दबाव भी था कि कमेटी की इन अहम सिफारिशों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
मुख्य बिंदु (Highlights):
- अब नहीं मिलेगा पेपर: अगले साल से नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा सिर्फ कंप्यूटर (CBT) पर होगी।
- मंत्रालयों की हरी झंडी: शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालय ने आपसी सहमति से सीबीटी मोड को मंजूरी दे दी है।
- बड़ा कारण: 3 मई को हुए पेपर लीक कांड के बाद परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।
- शिफ्टों में हो सकती है परीक्षा: 24 लाख छात्रों की वजह से एक दिन में परीक्षा कराना मुश्किल है, इसलिए इसे कई शिफ्टों में आयोजित करने पर विचार हो रहा है।
- तैयारी शुरू: NTA ने अगले साल की परीक्षा के लिए राज्य सरकारों के साथ बातचीत की रूपरेखा तैयार कर ली है।


