लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा के स्तर को और अधिक मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब कक्षा तीन से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को भी 'निपुण' बनाने के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस नए चरण में छात्रों के बौद्धिक और मानसिक विकास के लिए 10 विशेष मानक तय किए गए हैं, जिन्हें कड़ाई से लागू किया जाएगा।
मिशन का विस्तार: प्री-प्राइमरी से आगे की तैयारी
आपको बता दें कि अब तक 'निपुण भारत मिशन' के तहत केवल प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा दो तक के बच्चों पर ही ध्यान केंद्रित किया जा रहा था। लेकिन अब इस मुहिम का दायरा बढ़ाते हुए इसमें कक्षा 3, 4 और 5 को भी शामिल कर लिया गया है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों की बुनियादी शिक्षा और समझ को पूरी तरह परिपक्व बनाना है।
तनावमुक्त माहौल में होगी पढ़ाई
इस नए अभियान के तहत केवल किताबी ज्ञान पर ही जोर नहीं दिया जाएगा, बल्कि बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य (Social and Emotional Well-being) का भी खास ख्याल रखा जाएगा। 10 नए मानकों के आधार पर स्कूलों का माहौल ऐसा तैयार किया जाएगा जो:
- सहज और सुलभ हो: जहाँ बच्चे बिना किसी डर के अपनी बात कह सकें।
- सुरक्षित हो: छात्रों को स्कूल में पूरी तरह सुरक्षित और अपनापन महसूस हो।
- सकारात्मक हो: खेल-खेल में और रचनात्मक तरीकों से सीखने की भावना को बढ़ावा मिले।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
अक्सर देखा गया है कि बुनियादी कक्षाएं पार करने के बाद बच्चे अगली कक्षाओं में भाषा और गणित के बुनियादी सिद्धांतों में पिछड़ जाते हैं। कक्षा 3 से 5 तक के बच्चों के लिए लागू होने वाले ये 10 मानक यह सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चा अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार पढ़ने, लिखने और अंकगणित को समझने में पूरी तरह सक्षम यानी 'निपुण' हो सके।


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