लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शासन ने समग्र शिक्षा के तहत ब्लॉक संसाधन केन्द्रों (BRC) के पुनर्गठन और अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) की पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए नवीन दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इस नए शासनादेश के लागू होने से अब पूर्व में जारी सभी पुराने आदेश निष्प्रभावी हो गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब हर विकासखण्ड और नगर संसाधन केन्द्र में अकादमिक रिसोर्स पर्सन की संरचना, उनकी चयन प्रक्रिया, कार्यकाल और उनके उत्तरदायित्वों को पूरी तरह से री-डिफाइन किया गया है। आइए इस नई व्यवस्था को बिंदुवार विस्तार से समझते हैं।
1. ARP की नई संरचना और संगठनात्मक ढांचा
नए शासनादेश के अनुसार, प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड (Block) और नगर संसाधन केन्द्र में कुल 06 अकादमिक रिसोर्स पर्सन होंगे, जिनकी संरचना इस प्रकार होगी:
- 05 चयनित ARP: इनका चयन जनपद स्तर पर निर्धारित नई चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
- 01 पदेन ARP (DIET Mentor): संबंधित विकासखण्ड के लिए नामित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के एक मेंटर स्वतः पदेन ARP के रूप में कार्य करेंगे।
2. कौन बन सकेगा ARP? (चयन हेतु अनिवार्य अर्हताएं)
ARP बनने के इच्छुक परिषदीय शिक्षकों के लिए शासन ने कड़ी और स्पष्ट शर्तें तय की हैं:
- शैक्षणिक योग्यता: आवेदक के पास स्नातक उपाधि के साथ-साथ अध्यापक प्रशिक्षण योग्यता (जैसे- B.Ed/BTC आदि) होनी अनिवार्य है।
- शिक्षण अनुभव: परिषदीय प्राथमिक या उच्च प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम 05 वर्ष का शिक्षण अनुभव होना आवश्यक है।
- शेष सेवाकाल: शिक्षक की सेवानिवृत्ति (Retirement) में कम से कम 05 वर्ष की अवधि शेष होनी चाहिए।
- दागरहित रिकॉर्ड: आवेदक के खिलाफ किसी भी प्रकार की जांच गतिमान नहीं होनी चाहिए और न ही पूर्व में किसी अनुशासनात्मक कार्यवाही में वे दोषी सिद्ध हुए हों।
3. पारदर्शी चयन प्रक्रिया और अंक निर्धारण
चयन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए समाचार पत्रों में विकासखण्डवार रिक्तियों का विज्ञापन निकाला जाएगा। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में एक जनपद स्तरीय चयन समिति का गठन किया गया है, जिसमें डायट प्राचार्य, BSA, जिला समन्वयक और वरिष्ठतम खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) शामिल होंगे।
परीक्षा और मूल्यांकन का फॉर्मूला
ARP का चयन कुल 100 अंकों के आधार पर बनी मेरिट लिस्ट से होगा।
| घटक | मूल्यांकन स्तर | अंक |
|---|---|---|
| लिखित परीक्षा | राजकीय शिक्षकों/डायट प्रवक्ताओं द्वारा | 70 |
| साक्षात्कार | विषय ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, स्व-प्रेरणा | 30 |
| कुल | 100 | |
विशेष नियम: लिखित परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी ही साक्षात्कार (Interview) के लिए पात्र माने जाएंगे। साक्षात्कार के 2 दिनों के भीतर चयनितों की सूची नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाएगी।
4. कार्यकाल, नवीनीकरण और वेतन व्यवस्था
- कार्यकाल (Max 3 Years): ARP का शुरुआती कार्यकाल 01 वर्ष का होगा। डायट प्राचार्य, BSA और ब्लॉक मेंटर की संयुक्त 'परफॉरमेंस अप्रेजल रिपोर्ट' के आधार पर चयन समिति हर साल इसका नवीनीकरण करेगी। अधिकतम कार्यकाल 3 वर्ष का होगा, जिसके बाद वे भविष्य के लिए अनर्ह हो जाएंगे (बशर्ते आवेदन कम प्राप्त न हुए हों)।
- वेतन और मानदेय: चयनित ARP को कोई अलग से अतिरिक्त मानदेय या वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी। उनका वेतन उनके मूल कार्यरत विद्यालय से ही आहरित होगा। उन्हें सिर्फ स्वीकृत यात्रा भत्ता और TLM ग्रांट ही देय होगी।
5. ARP के मुख्य कार्य और कड़े उत्तरदायित्व
शासन ने ARP के कार्यों को पूरी तरह 'परिणाम-उन्मुख' (Result-oriented) बना दिया है:
- 30 यूनीक स्कूलों का दौरा: प्रत्येक ARP को हर महीने न्यूनतम 30 अलग-अलग स्कूलों का 'प्रेरणा गुणवत्ता ऐप' के माध्यम से सहयोगात्मक पर्यवेक्षण (On-site Support) करना होगा।
- स्पॉट एसेसमेण्ट: स्कूल दौरे के दौरान ARP को रैंडम आधार पर 05 बच्चों का ऑन-द-स्पॉट मूल्यांकन करना होगा, मॉडल क्लास चलानी होगी और स्वनिर्मित TLM का प्रदर्शन करना होगा।
- डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा: स्कूलों में दीक्षा (DIET) ऐप, पीएम ई-विद्या, खान एकेडमी जैसे डिजिटल टूल्स के प्रयोग के लिए शिक्षकों को प्रेरित करना होगा।
- मासिक कार्ययोजना: हर महीने की 25 तारीख तक अगले महीने का टूर प्लान डायट प्राचार्य और BSA को सौंपना होगा और हर महीने की 5 तारीख तक अपनी अचीवमेंट रिपोर्ट देनी होगी।
- बैठकों में प्रतिभाग: हर महीने होने वाली BEO-प्रधानाध्यापक बैठक और कम से कम एक 'शिक्षक संकुल' बैठक में भाग लेकर डेटा-आधारित फीडबैक देना होगा।
6. क्षमता संवर्द्धन और मिलने वाले भत्ते
ARP, SRG और डायट मेंटर्स के मनोबल और कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं:
- विशेष प्रशिक्षण: इन्हें सीमैट (SIEMAT), प्रयागराज में विशेष अकादमिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- मोबिलिटी भत्ता (Mobility Allowance): फील्ड में निरीक्षण के लिए एस०आर०जी० और ए०आर०पी० को ₹4,500 प्रति माह तथा डायट मेंटर को ₹2,000 प्रति माह तक का मोबिलिटी भत्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने पर मिलेगा।
- टी०एल०एम० ग्रांट (TLM Grant): शिक्षण सामग्री के निर्माण के लिए ₹500 प्रति माह की दर से धनराशि मिलेगी।
- सम्मान और शैक्षिक भ्रमण: एनबीएमसी (NBMC) डैशबोर्ड पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेंटर्स को राज्य व जनपद स्तर पर सम्मानित किया जाएगा और उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षिक भ्रमण (Educational Tour) पर भी भेजा जाएगा।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश शासन का यह कदम प्राथमिक शिक्षा में 'निपुण भारत मिशन' के लक्ष्यों को समय से हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा। चयन प्रक्रिया में कड़े मापदंड और कार्यों की लगातार डिजिटल मॉनिटरिंग से केवल योग्य और कर्मठ शिक्षक ही इस जिम्मेदारी को संभाल पाएंगे, जिससे अंततः परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के सीखने के स्तर (Learning Outcomes) में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।


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