Type Here to Get Search Results !

परिषदीय स्कूलों से 613 टैबलेट गायब होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप, कड़े एक्शन की तैयारी

Sir Ji Ki Pathshala

बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था में घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। परिषदीय विद्यालयों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से बांटे गए 613 टैबलेट अचानक गायब हो गए हैं। विभागीय समीक्षा के दौरान जब इन टैबलेटों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, तो बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने तुरंत इस पर कड़े रुख के साथ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

​करीब एक साल पहले बेसिक शिक्षा विभाग ने तकनीक आधारित पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को ये टैबलेट सौंपे थे। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के लिए ऑनलाइन शैक्षिक सामग्री का संचालन करना, विभागीय एप्लीकेशनों के जरिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग को आसान बनाना और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी तरीके से करना था। सरकार ने इन टैबलेट्स के सुचारू संचालन, रखरखाव और इंटरनेट रिचार्ज के लिए भी बकायदा बजट और निर्देश जारी किए थे, ताकि डिजिटल लर्निंग की राह में कोई बाधा न आए।

: 613 सरकारी टैबलेट गायब होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप, कड़े एक्शन की तैयारी

​इस बड़े घालमेल का खुलासा हाल ही में हुई एक विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान हुआ। जब अधिकारियों ने टैबलेट्स की मौजूदा स्थिति की बारीकी से जांच की, तो बेहद चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। कई स्कूलों में टैबलेट भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं थे। कुछ स्थानों पर शिक्षकों द्वारा उनके खराब होने का बहाना बनाया गया, तो कई स्कूलों के पास इनके रखरखाव या उपयोग का कोई लिखित रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं था।

​इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए अपर परियोजना निदेशक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। बीएसए विकास चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित विद्यालयों से जानकारी जुटाई जा रही है और जल्द ही पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस जांच के दायरे में कई प्रधानाध्यापक और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि ये टैबलेट आखिर कहां गए और यदि इसमें किसी भी स्तर पर हेराफेरी पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निलंबन और सरकारी धन की रिकवरी जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​इस घटना ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर उनके सुपरविजन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर सरकारी स्कूलों को 'स्मार्ट' बनाने और बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने में जुटी है, वहीं जमीनी स्तर पर इस तरह की लापरवाही डिजिटल मिशन को बड़ा झटका देती है। अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच के बाद क्या ये टैबलेट बरामद हो पाते हैं या फिर लापरवाही की गाज जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरती है।

Top Post Ad

Bottom Post Ad