प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) शनिवार और रविवार को प्रवक्ता (PGT) संवर्ग की लिखित परीक्षा आयोजित कर रहा है। 18 विभिन्न विषयों के कुल 624 पदों के लिए होने वाली इस परीक्षा में प्रदेश भर से 4,64,605 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है।
चयन आयोग ने परीक्षा को पूरी तरह नकल विहीन और पारदर्शी बनाने के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं।
परीक्षा का कार्यक्रम और केंद्र व्यवस्था
आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार के अनुसार, परीक्षा 17 जनपदों के 319 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। परीक्षा दो पालियों में संपन्न होगी:
- प्रथम पाली: सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक।
- द्वितीय पाली: दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक।
सुरक्षा और व्यवस्था की समीक्षा स्वयं अध्यक्ष द्वारा की गई है। प्रत्येक जनपद में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ आयोग द्वारा नियुक्त विशेष प्रेक्षक (Observers) भी तैनात किए गए हैं।
AI और आधुनिक तकनीक से निगरानी
इस बार परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया है:
- इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम: सभी परीक्षा केंद्रों के हर कमरे को एआई (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। इनका सीधा प्रसारण जिला मुख्यालय और आयोग के अत्याधुनिक कंट्रोल रूम में देखा जा सकेगा।
- संदिग्धों की पहचान: आयोग ने एआई की मदद से उन अभ्यर्थियों को पहले ही चिन्हित कर लिया है, जिन्होंने एक ही नाम पर अलग-अलग फोटो या अलग-अलग नामों पर एक ही फोटो लगाकर मल्टीपल फॉर्म भरे थे। ऐसे अभ्यर्थियों पर परीक्षा के दौरान विशेष नजर रखी जाएगी।
- इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर प्रतिबंध: मोबाइल, ब्लूटूथ या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को केंद्र के भीतर ले जाना पूरी तरह वर्जित है।
सख्त कानूनी प्रावधान (नया अधिनियम 2024)
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति नकल कराते हुए या परीक्षा की मर्यादा भंग करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ 'उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024' के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है।
लखनऊ में पायलट प्रोजेक्ट: परीक्षा हॉल में ही होगी ओएमआर स्कैनिंग
पारदर्शिता की दिशा में आयोग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। लखनऊ मंडल के 10 केंद्रों को एक पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। इन केंद्रों पर:
- परीक्षा समाप्त होते ही परीक्षार्थियों और कक्ष निरीक्षकों के सामने ही ओएमआर (OMR) शीट की स्कैनिंग की जाएगी।
- स्कैन किए गए डेटा को तुरंत सुरक्षित (Secure) कर लिया जाएगा।
- इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा केंद्र से बाहर ले जाते समय ओएमआर शीट में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ संभव न हो सके।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आयोग भविष्य की सभी परीक्षाओं में इसे अनिवार्य रूप से लागू करेगा।
अभ्यर्थियों के लिए सलाह
आयोग के अध्यक्ष ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें। आधिकारिक सूचनाओं के लिए केवल आयोग की वेबसाइट और उनके आधिकारिक 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर ही भरोसा करें। केंद्रों के आसपास धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू रहेगी, अतः अभ्यर्थी समय से पूर्व अपने केंद्रों पर पहुँचें।


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