Type Here to Get Search Results !

शिक्षामित्रों की सेवा अवधि 62 वर्ष किए जाने के संबंध में शासन ने जनपदों से तलब की रिपोर्ट

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत शिक्षामित्रों की सेवा अवधि को 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। विभिन्न शिक्षामित्रों और संगठनों द्वारा शासन स्तर पर भेजे गए कई प्रत्यावेदनों के बाद अब महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय (समग्र शिक्षा) ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के 25 जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से इस संबंध में अविलंब आख्या और सूचना मांगी है।

Shikshamitra 62 Years Retirement

​अपर राज्य परियोजना निदेशक प्रेम रंजन सिंह द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुक्रम में सभी संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने जनपद से जुड़े प्रकरणों की रिपोर्ट निर्धारित ईमेल आईडी पर तुरंत भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

​इन 25 जनपदों के BSA से मांगी गई आख्या

​शासन ने जिन जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने के लिए निर्देशित किया है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​औरैया, बस्ती, बलिया, ललितपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर

  • ​मुरादाबाद, जौनपुर, बिजनौर, महाराजगंज, बदायूं, फिरोजाबाद, मऊ

  • ​उन्नाव, लखनऊ, मथुरा, रायबरेली, गोंडा, अंबेडकर नगर, हाथरस

  • ​लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, हमीरपुर

​क्या हैं शिक्षामित्रों के मुख्य तर्क और मांगें?

​विभिन्न जिलों से आए शिक्षामित्रों (जैसे गोंडा से सुश्री इमरा खातून, लखनऊ से सुश्री अंजू द्विवेदी, उन्नाव से श्री निजामुद्दीन, शाहजहांपुर से श्री सुरेश चन्द और मऊ से पुनीता श्रीवास्तव) के आवेदनों में कुछ बेहद महत्वपूर्ण बिंदुओं को आधार बनाया गया है:

  • नियमित अध्यापकों के समान कार्य और प्रशिक्षण: शिक्षामित्रों का कहना है कि उनका चयन जिला शिक्षा समिति द्वारा पूरी प्रक्रिया के तहत किया गया था और उन्हें 2 वर्ष का दूरस्थ बी.टी.सी. (B.T.C.) प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है। वर्तमान में वे प्राथमिक विद्यालयों में नियमित सहायक अध्यापकों की भांति ही पूरी निष्ठा से शिक्षण कार्य कर रहे हैं।

  • रिक्त पदों के सापेक्ष नियुक्ति: आवेदनों में यह तर्क दिया गया है कि उनकी नियुक्ति प्राथमिक सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों के सापेक्ष की गई थी। चूंकि एक नियमित सहायक अध्यापक की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष निर्धारित है, इसलिए शिक्षामित्रों की सेवा अवधि भी 62 वर्ष की जानी चाहिए।
  • अनौपचारिक अनुदेशकों को वरीयता: अधिकांश शिक्षामित्र पूर्व में 'अनौपचारिक अनुदेशक' के रूप में कार्य कर चुके हैं, जिन्हें वर्ष 2005 के शासनादेश के तहत आयु सीमा में छूट और वरीयता देकर शिक्षामित्र पद पर नियुक्त किया गया था।

​17 फरवरी 2023 का शासनादेश बना बड़ी चिंता

​शिक्षामित्रों ने अपने प्रत्यावेदनों में प्रमुख सचिव दीपक कुमार द्वारा जारी 17 फरवरी 2023 के शासनादेश का विशेष रूप से उल्लेख किया है। इस शासनादेश के तहत शिक्षामित्रों के संविदा पर कार्य करने की अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष निर्धारित की गई थी, जिसके पूरा होते ही सेवाएं स्वतः समाप्त होने के निर्देश हैं।

​चूंकि बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षामित्रों की जन्मतिथि 1965 और 1966 के आस-पास है, इसलिए वे इस समय 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं या उसे पार कर रहे हैं। सेवा समाप्ति के इसी डर को देखते हुए शिक्षामित्रों ने आजीविका और शैक्षिक दायित्वों को जारी रखने के लिए अतिरिक्त अवसर की गुहार लगाई है। कुछ आवेदनों में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस आयु सीमा को बढ़ाने से संबंधित एक याचिका कोर्ट में भी विचाराधीन है।

​शासन स्तर पर अग्रिम कार्रवाई

​बेसिक शिक्षा अनुभाग-5 के संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय द्वारा हस्ताक्षरित पत्रों से स्पष्ट है कि शासन स्तर पर इन आवेदनों को गंभीरता से लिया गया है और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) और सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज को भी आवश्यक सूचनार्थ प्रतियां भेजी गई हैं।

​अब गेंद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के पाले में है। जनपदों से आने वाली आख्याओं और रिपोर्ट के आधार पर ही उत्तर प्रदेश सरकार यह तय करेगी कि शिक्षामित्रों की सेवा अवधि को 62 वर्ष करने का बड़ा फैसला लिया जाएगा या नहीं। 

📥 69 पेज का आदेश मय प्रत्यावेदन (PDF)
📌 प्रिंट करने हेतु यहाँ से आधिकारिक PDF सुरक्षित करें।