नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) और सेवा में बने रहने के लिए अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की वैधता को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई 2026 को दोपहर 2:00 बजे निर्धारित की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 'स्टेट ऑफ यू.पी. बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट' (Diary No. 53434/2025) के रूप में शीर्ष अदालत में विचाराधीन है। विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि क्या उन शिक्षकों के लिए भी TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, जो इस नियम के लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे, विशेषकर जब बात उनकी पदोन्नति या सेवा में बने रहने की हो।
ताजा घटनाक्रम और कोर्ट अपडेट
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस केस की हालिया स्थिति इस प्रकार है:
- पिछली सुनवाई: 28 अप्रैल 2026 को माननीय न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध था।
- कोर्ट का आदेश: सुनवाई के दौरान एक अंतरिम आवेदन (IA No. 237685/2025) को स्वीकार कर लिया गया है।
- अगली तारीख: अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले को 13 मई 2026 को दोपहर के सत्र (2:00 PM) में विस्तार से सुना जाए।
हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा असर
यह प्रकरण उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग और हजारों शिक्षकों के भविष्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मामला मुख्य रूप से सर्विस लॉ (Service Laws) की श्रेणी में आता है, जिसमें नियुक्ति, पदोन्नति, और सेवा शर्तों से जुड़े मानक तय होने हैं। यदि न्यायालय TET की अनिवार्यता को बरकरार रखता है, तो उन शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है जिन्होंने अब तक यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
वहीं, शिक्षकों का एक बड़ा पक्ष यह दलील दे रहा है कि पुरानी नियुक्तियों पर नए नियमों को इस तरह लागू करना उनके करियर की प्रगति में बाधा है। अब सभी की निगाहें 13 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ कोर्ट के रुख से शिक्षकों के प्रमोशन और भविष्य की सेवा शर्तों की तस्वीर साफ होगी।


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