नोएडा/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का अंदाज़ बदलने वाला है। प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। 'समग्र शिक्षा (माध्यमिक)' अभियान के तहत प्रदेश के 250 चुनिंदा शिक्षकों को हाई-टेक ट्रेनिंग देने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में सजेगी कार्यशाला
आगामी 23 और 24 अप्रैल को नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) में एक विशेष द्वि-दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का मुख्य विषय "इंपावरिंग डिजिटल टीचिंग एंड लर्निंग: प्रैक्टिकल स्टेम (STEM) एजुकेशन फॉर इंडियन क्लासरूम" रखा गया है। इसमें प्रदेश भर के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों से कक्षा 9 से 12 तक के विज्ञान और गणित के शिक्षकों को नामित किया गया है।
क्या है इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य?
इस विशेष ट्रेनिंग का लक्ष्य शिक्षकों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें डिजिटल और प्रयोगात्मक (Practical) तौर-तरीकों से रूबरू कराना है। ट्रेनिंग के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- डिजिटल टीचिंग टूल्स: शिक्षकों को सिखाया जाएगा कि कैसे स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।
- प्रैक्टिकल STEM एजुकेशन: विज्ञान (Science), तकनीक (Technology), इंजीनियरिंग (Engineering) और गणित (Maths) को रटने के बजाय प्रयोगों के जरिए कैसे समझाएं।
- छात्रों में रुचि पैदा करना: अक्सर छात्र गणित और विज्ञान को कठिन विषय मानते हैं; यह ट्रेनिंग शिक्षकों को ऐसे तरीके सिखाएगी जिससे इन विषयों के प्रति छात्रों का आकर्षण और समझ दोनों बढ़े।
भविष्य की तैयारी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बच्चों को शिक्षा दे सकेंगे। जब शिक्षक खुद आधुनिक तकनीक से लैस होंगे, तभी वे छात्रों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार कर पाएंगे।
यह पहल न केवल प्रदेश के 'डिजिटल लर्निंग' मिशन को गति देगी, बल्कि माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में भी एक बड़ा सुधार लेकर आएगी।


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