लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बाल देखरेख संस्थानों (Child Care Institutions - CCIs) में रहने वाले बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। माननीय उच्च न्यायालय की 'जुवेनाइल जस्टिस कमेटी' के निर्देशों के अनुपालन में, राज्य के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन बच्चों के शैक्षणिक पुनर्वास के लिए जिला स्तर पर 'संयुक्त जिला प्रवेश समिति' के गठन का आधिकारिक आदेश जारी किया है।
शिक्षा के अधिकार को जमीन पर उतारने की पहल
अपर मुख्य सचिव, पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य सीसीआई में रहने वाले बच्चों का स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित करना और उनके सर्वांगीण विकास के लिए उचित शैक्षिक वातावरण प्रदान करना है।
इस नई व्यवस्था के तहत, बच्चों के 'लर्निंग गैप्स' (सीखने की कमी) को पहचानने के लिए 'Comprehensive Educational Mapping' की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को उनकी आयु के अनुसार सही कक्षा (Age-appropriate Class Placement) में दाखिला मिल सके और उनकी विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
जिला स्तर पर समिति का गठन
प्रत्येक जनपद में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में एक शक्तिशाली समिति का गठन किया गया है। इस समिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को बतौर सदस्य शामिल किया गया है, जबकि जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) इसके सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
प्रमुख दिशा-निर्देश और कार्ययोजना
सरकार द्वारा जारी पत्र में बच्चों के नामांकन को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की गई है:
- जिम्मेदारी का निर्धारण: कक्षा 8 तक के प्रवेश की जिम्मेदारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की होगी, जबकि कक्षा 9 और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) उत्तरदायी होंगे।
- त्वरित प्रक्रिया: जैसे ही किसी नए बच्चे का सीसीआई में प्रवेश होगा, जिला प्रोबेशन अधिकारी तुरंत संबंधित शिक्षा अधिकारियों को सूचित करेंगे ताकि मूल्यांकन और प्रवेश की प्रक्रिया बिना किसी विलंब के शुरू की जा सके।
- समय सीमा: शैक्षणिक सत्र की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह निर्देश दिया गया है कि सभी प्रवेश प्रक्रियाएं प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के मार्च माह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर ली जाएं।
- SOP का निर्माण: समिति को यह अधिकार दिया गया है कि वे सीसीआई में रहने वाले बच्चों के 100% नामांकन के लिए एक 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) तैयार करें।
निष्कर्ष
यह पहल न केवल बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ेगी, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। सरकार का यह कदम उच्च न्यायालय की मंशा के अनुरूप बच्चों के 'शिक्षा के अधिकार' को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा।






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