बरेली। उत्तर प्रदेश सरकार की 'समग्र शिक्षा अभियान' योजना के तहत स्कूलों को हाई-टेक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बरेली के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने जनपद के समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर प्राथमिक विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट क्लास और आई.सी.टी. (ICT) लैब के भौतिक सत्यापन और उपभोग प्रमाण-पत्र जमा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
करोड़ों का बजट हुआ था जारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 में जिले के 45 विद्यालयों में ICT लैब स्थापित करने के लिए ₹1,33,500 प्रति विद्यालय (कुल ₹60,07,500) और 445 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के लिए ₹38,000 प्रति विद्यालय (कुल ₹1,69,10,000) की धनराशि जारी की गई थी। यह राशि सीधे विकास क्षेत्र के एस.एम.सी. (SMC) खातों में हस्तांतरित की गई थी।
सत्यापन के लिए अनिवार्य शर्तें
विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल सामान खरीदना पर्याप्त नहीं है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण करें और निम्नलिखित दस्तावेज सुनिश्चित करें:
- जियो-टैग फोटोग्राफ: खरीदी गई सामग्री की मौके पर फोटो।
- स्टॉक पंजिका: विद्यालय के स्टॉक रजिस्टर में एंट्री।
- बिल और वाउचर: खरीद से संबंधित सभी मूल बिलों की छायाप्रति।
10 अप्रैल तक की समय सीमा
BSA द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह समस्त विवरण 10 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को भी चेतावनी दी गई है कि वे 2 दिनों के भीतर अपने विकास क्षेत्र पर उपभोग प्रमाण-पत्र और अन्य साक्ष्य जमा करें।
चेतावनी: "निर्धारित समय सीमा के भीतर डेटा और सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध न कराने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"


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