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मिशन कर्मयोगी: साधना सप्ताह 2026 में 46 लाख सिविल सेवकों ने बनाया रिकॉर्ड, PM मोदी का संबोधन

Sir Ji Ki Pathshala

मिशन कर्मयोगी: 'साधना सप्ताह 2026' के माध्यम से विकसित भारत की नींव रख रहे हैं देश के सिविल सेवक

Prime Minister Narendra Modi’s letter on Karmayogi Sadhana Saptah 2026

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'कर्मयोगी साधना सप्ताह 2026' के सफल समापन पर देश के लाखों सिविल सेवकों को संबोधित करते हुए एक प्रेरक संदेश साझा किया है। उन्होंने इस सप्ताह को केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि 'ज्ञान-प्राप्ति का उत्सव' बताया, जो पूरे भारत के अधिकारियों को एक सूत्र में पिरोता है।

​सीखने की प्रक्रिया में अभूतपूर्व वृद्धि

​इस वर्ष का साधना सप्ताह आंकड़ों के लिहाज से ऐतिहासिक रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार:

  • व्यापक भागीदारी: 46 लाख से अधिक शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया।
  • कोर्स पूर्णता: 3.1 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए गए, जो पिछले राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह की तुलना में 8 गुना वृद्धि दर्शाता है।
  • समर्पित अध्ययन: लगभग 33.4 लाख शिक्षार्थियों ने iGOT प्लेटफॉर्म पर 4 घंटे से अधिक का निरंतर अध्ययन पूरा किया।
  • विविधता: 136 विषय-आधारित वेबिनार और 84 सामूहिक चर्चाओं के माध्यम से तकनीकी, परंपरा और ठोस परिणामों पर संवाद हुआ।

​भविष्य की तैयारी: AI और डिजिटल कौशल

​प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि 21वीं सदी में 'अप-टू-डेट' रहना अब वैकल्पिक नहीं रह गया है। शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने की दिशा में बड़ी प्रगति देखी गई:

  • ​लगभग 36.6 लाख शिक्षार्थियों ने कम से कम एक AI पाठ्यक्रम पूरा किया।
  • 22.8 लाख से अधिक अधिकारियों ने 'AI दक्ष' बैज प्राप्त किया, जो भविष्य की तकनीक के प्रति सरकार की संस्थागत तैयारी को दर्शाता है।

​'पंच प्रण' और नागरिक केंद्रित शासन

​प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में याद दिलाया कि मिशन कर्मयोगी की आधारशिला 'पंच प्रण' से प्रेरित है। उन्होंने सिविल सेवकों से आग्रह किया कि वे औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़कर 'नागरिक देवो भव' के सिद्धांत को अपने हर निर्णय के केंद्र में रखें।

​साधना सप्ताह के तीन मुख्य स्तंभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा:

  1. तकनीकी रूप से तैयार होना: आधुनिक उपकरणों का प्रभावी उपयोग।
  2. परंपराओं को समझना: अपनी संस्कृति में निहित होकर कार्य करना।
  3. ठोस परिणाम प्राप्त करना: नागरिक के कल्याण को प्राथमिकता देना।

​'संपूर्ण-सरकार' दृष्टिकोण का आह्वान

​संबोधन के अंत में, पीएम मोदी ने अधिकारियों को 'साइलो' (Silos) यानी अलग-अलग रहकर काम करने की पुरानी मानसिकता को त्यागने की सलाह दी। उन्होंने 'संपूर्ण-सरकार' (Whole-of-Government) दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया, ताकि भारत की प्रगति में हर विभाग और हर राज्य का सामूहिक योगदान सुनिश्चित हो सके।

​"आप ईंट दर ईंट, पाठ्यक्रम दर पाठ्यक्रम और कौशल दर कौशल एक महान राष्ट्र का निर्माण कर रहे हैं। आपकी यह साधना 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध करेगी।" — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Prime Minister Narendra Modi’s letter on Karmayogi Sadhana Saptah 2026