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टेट अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन हुआ तेज, महाराष्ट्र के दिग्गज शिक्षक संगठनों ने TFI से मिलाया हाथ

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली: शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग अब एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले रही है। इसी कड़ी में, महाराष्ट्र के प्रमुख शिक्षक संगठनों ने #NoTetBeforeRteAct मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए TFI4India के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का निर्णय लिया है।

​दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में हुई अहम बैठक

​हाल ही में दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में महाराष्ट्र की राजनीति और शिक्षक आंदोलनों का बड़ा चेहरा रहे पूर्व एमएलसी श्रीकांत देशपांडे (संस्थापक अध्यक्ष, शिक्षक आघाड़ी विदर्भ) और दत्तात्रेय सावंत (पूर्व एमएलसी एवं महासचिव, महाराष्ट्र शाला कृति समिति) शामिल हुए।

​बैठक के दौरान 'टीएफआई4इंडिया' के प्रतिनिधियों के साथ आंदोलन की भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि पुराने शिक्षकों पर टेट थोपना उनके अनुभवों और सेवा शर्तों के साथ अन्याय है।

​आंदोलन को मिलेगा राष्ट्रीय विस्तार

​बैठक में बनी सहमति के अनुसार, महाराष्ट्र के ये दोनों संगठन जल्द ही औपचारिक रूप से टीएफआई के सदस्य बनेंगे। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • व्यापक लामबंदी: महाराष्ट्र के लाखों शिक्षकों को इस मुहिम से जोड़कर आंदोलन को राज्य स्तर पर और अधिक सक्रिय किया जाएगा।
  • कानूनी और नैतिक पक्ष: नेताओं ने जोर दिया कि जो शिक्षक आरटीई कानून आने से पहले ही शिक्षण कार्य कर रहे हैं, उनकी योग्यता पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है।
  • टीएफआई के प्रयासों की सराहना: श्रीकांत देशपांडे और दत्तात्रेय सावंत ने टीएफआई द्वारा उठाए गए इस साहसिक कदम की प्रशंसा की और इसे शिक्षक हित में ऐतिहासिक बताया।

​क्यों बढ़ रहा है विरोध?

​शिक्षकों का तर्क है कि RTE एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों की सेवा शर्तें अलग थीं। उन पर वर्तमान नियमों को पूर्वव्यापी (Retrospective) प्रभाव से लागू करना उनके करियर और मानसिक शांति के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।

"यह केवल महाराष्ट्र की नहीं, बल्कि पूरे देश के उन पुराने शिक्षकों की लड़ाई है जिन्होंने दशकों तक शिक्षा की नींव मजबूत की है। हम टीएफआई के साथ मिलकर इस मांग को केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुँचाएंगे।" > — शिक्षक नेतृत्व, महाराष्ट्र सदन बैठक के दौरान

​भविष्य की राह

​महाराष्ट्र के इन शक्तिशाली संगठनों के जुड़ने से इस आंदोलन को जबरदस्त मजबूती मिली है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में अन्य राज्यों के शिक्षक संगठन भी इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं, जिससे केंद्र सरकार पर नीतिगत बदलाव के लिए दबाव बढ़ना तय है।

Maharashtra Teachers Protest No TET Before RTE Act Meeting Delhi