लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी जनगणना 2027 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। वर्तमान में मकान सूचीकरण (House Listing) का कार्य प्रगति पर है, जिसमें शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को 'प्रगणक' एवं 'पर्यवेक्षक' के रूप में तैनात किया गया है। हालांकि, इस ड्यूटी के समय को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
ग्रीष्मकालीन अवकाश और अनिवार्य ड्यूटी का टकराव
विधान परिषद सदस्य (MLC) आशुतोष सिन्हा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिक्षकों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। पत्र के अनुसार, जनगणना का यह महत्वपूर्ण कार्य ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) के दौरान कराया जा रहा है।
शिक्षक समुदाय का तर्क है कि वैकेशन विभाग का हिस्सा होने के नाते, गर्मी की छुट्टियां उनका वैध अधिकार हैं। इस अवधि में सरकारी ड्यूटी पर तैनात किए जाने के कारण वे अपने अवकाश का उपभोग नहीं कर पा रहे हैं।
क्या कहते हैं नियम?
आशुतोष सिन्हा ने अपने पत्र में उत्तर प्रदेश फाइनेंशियल हैंडबुक के प्रावधानों का हवाला देते हुए निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट किए हैं:
- अर्जित अवकाश (Earned Leave) का अधिकार: यदि किसी 'वैकेशन विभाग' के कर्मचारी को उसकी छुट्टियों के दौरान अनिवार्य राजकीय कार्य में लगाया जाता है, तो वह उस कार्य अवधि के बदले 'अर्जित अवकाश' पाने का हकदार होता है।
- राष्ट्रीय कार्य की गरिमा: चूंकि जनगणना एक अनिवार्य राष्ट्रीय कार्य है, इसलिए इसमें प्रशिक्षण और वास्तविक गणना में बिताए गए दिनों को सेवा अभिलेखों (Service Records) में दर्ज करना न्यायोचित है।
"मांग पूरी न होने पर सदन में उठेगा मुद्दा"
MLC सिन्हा ने मुख्यमंत्री से विनम्र निवेदन किया है कि शिक्षा और वित्त विभाग को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शिक्षकों के वैधानिक अधिकारों का संरक्षण हो सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा है कि:
"यदि इस विषय पर समयबद्ध और समुचित निर्णय नहीं लिया गया, तो मैं इसे आगामी मानसून सत्र में विधान परिषद के पटल पर उठाने के लिए बाध्य होऊंगा।" _MLC आशुतोष सिन्हा

