मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण को लेकर शिक्षा विभाग अलर्ट, जारी हुए कड़े दिशा-निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी दिनों में प्रदेश के विभिन्न जनपदों का तूफानी दौरा करने वाले हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री विकास कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण भी करेंगे। मुख्यमंत्री के इस संभावित कार्यक्रम को देखते हुए बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।
अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से प्रदेश के सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) और बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इन बिंदुओं पर रहेगी मुख्यमंत्री की पैनी नजर
जारी पत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री के भ्रमण के दौरान राजकीय इंटर कॉलेज, उच्च प्राथमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालयों का बारीकी से निरीक्षण किया जा सकता है। निरीक्षण के मुख्य केंद्र बिंदु निम्नलिखित होंगे:
- शिक्षा की गुणवत्ता और उपस्थिति: छात्रों की संख्या के साथ-साथ शिक्षकों की समय पर उपस्थिति और उनके पढ़ाने के स्तर की जांच होगी।
- अवसंरचना: स्कूल भवन की स्थिति, प्रयोगशालाओं (Labs) की क्रियाशीलता, पेयजल और शौचालयों की स्वच्छता।
- लर्निंग आउटकम: छात्रों का शैक्षणिक स्तर, उनके परीक्षा परिणाम और सीखने की क्षमता का आकलन।
- एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज: खेलकूद, सेमिनार, क्विज और अन्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों के सर्वांगीण विकास पर जोर।
- सुरक्षा मानक: विद्यालयों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और अन्य बुनियादी सुविधाएं।
लापरवाह शिक्षकों और कर्मचारियों पर गिरेगी गाज
शासन द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि निरीक्षण के दौरान केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और कर्मचारियों की कर्मठता, व्यवहार और उनके योगदान की जानकारी भी ली जाएगी। पत्र में अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे समय रहते सभी तैयारियां पूरी कर लें और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।
"अधिकारी अपने कुशल नेतृत्व में विभागीय तैयारियों को धरातल पर उतारें, ताकि मुख्यमंत्री के भ्रमण के दौरान कहीं भी कोई कमी न मिले।" - पार्थ सारथी सेन शर्मा, अपर मुख्य सचिव
विभाग में मची हलचल
मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख और शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए पत्र के बाद जिलों में खलबली मच गई है। सभी बीएसए और डीआईओएस को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों का स्वयं दौरा करें और कमियों को तत्काल दूर करें। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाना है।

