Type Here to Get Search Results !

अब आधार या जन्म प्रमाण पत्र के बिना भी स्कूलों में होगा बच्चों का नामांकन, शिक्षा विभाग का सख्त आदेश

Sir Ji Ki Pathshala

सीतापुर। शिक्षा के अधिकार (RTE) को और अधिक प्रभावी बनाने और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में दस्तावेज़ों की कमी के कारण बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिल पाता। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), सीतापुर ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी बच्चे को दस्तावेज़ों के अभाव में शिक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।

दस्तावेज़ों की कमी नहीं बनेगी शिक्षा में बाधा

​हाल ही में जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह संज्ञान में आया था कि कई स्कूलों में प्रधानाध्यापकों द्वारा बच्चों का नामांकन केवल इसलिए नहीं किया जा रहा था क्योंकि उनके पास जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड उपलब्ध नहीं थे। विभाग ने इसे छात्र हित के विरुद्ध मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

​आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि: ​"यह सुनिश्चित किया जाए कि अध्यापकों द्वारा किसी भी बच्चे को जन्म प्रमाण पत्र अथवा आधार पहचान संबंधी दस्तावेजों के अभाव में प्रवेश से वंचित न किया जाए।"

अभिभावकों की सूचना को ही माना जाएगा आधार

​नए नियमों के तहत, यदि किसी बच्चे के पास सरकारी दस्तावेज़ मौजूद नहीं हैं, तो अभिभावकों द्वारा दी गई जानकारी (जैसे बच्चे की आयु और पहचान का विवरण) को ही प्रवेश के लिए मान्य माना जाएगा। स्कूल प्रशासन का यह दायित्व होगा कि वह अभिभावक की सूचना के आधार पर बच्चे का नामांकन तुरंत सुनिश्चित करे।

शत-प्रतिशत नामांकन पर जोर

​सरकार का लक्ष्य 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को स्कूल तक पहुँचाना है। इसके लिए विभाग ने निम्नलिखित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:

  • हाउस होल्ड सर्वे: सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में सर्वे कराएं और स्कूलों से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान करें।
  • रोस्टर आधारित कार्य: नामांकन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए स्कूलों को रोस्टर बनाकर कार्य करने को कहा गया है।
  • सख्त अनुपालन: शासनादेश संख्या 68-5099/105/2024 के तहत इन निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की चेतावनी दी गई है।

​प्रशासन का यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है जो कागजी कार्रवाई की जटिलताओं के कारण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते थे। अब 'सूचना ही प्रमाण है' के सिद्धांत पर बच्चों का भविष्य संवारा जाएगा। शिक्षा विभाग का यह मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदेश में साक्षरता दर बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।

BSA Sitapur official order copy regarding school admission without documents